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नरेगा में बदलाव के विरोध में कांग्रेस देहात ने किया उपवास
By Lokjeewan Daily - 12-01-2026


- जिलाध्यक्ष जाट बोले-केंद्र सरकार जब तक प्रस्तावित कानून वापस नहीं लेती विरोध जारी रहेगा
लोकजीवन न्यूज सर्विस, भीलवाड़ा
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी एक्ट लाने के विरोध  में देहात जिला कांग्रेस ने आज रेलवे स्टेशन चौराहा पर संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास उपवास किया। इसका नेतृत्व देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास रख केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध जताया। पीसीसी उपाध्यक्ष हगामीलाल मेवाड़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष अक्षय त्रिवेदी व कैलाश व्यास, राजेंद्र त्रिवेदी, ओम नराणीवाल, पीसीसी सचिव विभा माथुर, शंकरलाल गाडरी, गोवर्धन गुर्जर, हेमेंद्र शर्मा, महेश सोनी, दुर्गेश शर्मा, रणदीप त्रिवेदी, पूर्व जिला प्रमुख सुशीला सालवी, लादूलाल गुर्जर, ओमप्रकाश तेली, चेतन डीडवानिया, प्रद्युम्न सिंह, मांडल प्रधान शंकर कुमावत, मांडलगढ़ प्रधान जितेंद्र मूंदड़ा,  पीसीसी मेंबर संदीप जीनगर, शंकर डांगी आदि कार्यकर्ता उपवास पर बैठे हैं। कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष जाट ने बताया कि उनके नाम को लेकर विरोध नहीं है, हमारा विरोध तो नरेगा को कमजोर करने को लेकर है।
पहले मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी और 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। ऐसा नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता मिलता था। अब यह अधिकार न रहकर सरकार की मर्जी पर निर्भर रह जाएगा। पहले न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी थी और साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था। अब मजदूरी मनमाने ढंग से तय होगी। फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी। पहले ग्राम पंचायतों को कार्योंं के नियोजन और सिफारिश का अधिकार था तथा ठेकेदारों पर प्रतिबंध था। अब सभी फैसले दिल्ली से लिए जाएंगे, जिससे पंचायतें केवल आदेश लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएंगी और ठेकेदारों को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह पहले केंद्र सरकार मजदूरी का 100 प्रतिशत भुगतान करती थी। अब राज्यों को 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा, जिससे काम उपलब्ध कराने में कठिनाई आएगी।
पूर्व मंत्री जाट ने बताया कि कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें हैं। पहली, काम, मजदूरी और जवाबदेही की पूर्ण गारंटी। दूसरी, मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी। तीसरी काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और चौथी मांग न्यूनतम वेतन 400 रुपये सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार जब तक यह फैसला वापस नहीं ले लेती तब तक कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा।

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