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भीलवाड़ा लोकजीवन। महात्मा गांधी अस्पताल के वार्डों में इन दिनों मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की भारी तादाद प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि बेड, दवाइयां और चिकित्सा संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन एक मरीज के साथ कई-कई अटेंडेंट (परिजनों) के रुकने के कारण वार्डों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के वार्डों में न केवल व्यस्क, बल्कि छोटे-छोटे बच्चे भी परिजनों के साथ नजर आ रहे हैं। कई परिजन अपने घरों के छोटे बच्चों को भी साथ लेकर अस्पताल आ रहे हैं, जिससे अस्पताल के भीतर का माहौल किसी सार्वजनिक स्थल जैसा दिखने लगा है। वार्ड की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बेड के आसपास परिजनों की भीड़ लगी है, जिससे नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को राउंड लेने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर संकट
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर परिजनों की इतनी अधिक भीड़ न केवल मरीजों के लिए नुकसानदेह है, बल्कि स्वस्थ लोगों के लिए भी खतरनाक है। वार्ड में छोटे बच्चों की मौजूदगी उन्हें गंभीर संक्रमण का शिकार बना सकती है। भीड़ के कारण होने वाले शोर-शराबे से गंभीर मरीजों के आराम में खलल पड़ रहा है। अधिक भीड़ होने से वार्डों में सफाई व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
अस्पताल प्रशासन की अपील
अस्पताल प्रबंधन ने बार-बार अपील की है कि एक मरीज के साथ केवल एक ही तीमारदार रुके, लेकिन नियमों की अनदेखी जारी है। विशेष रूप से बच्चों को वार्ड में लाने पर सख्ती की आवश्यकता है ताकि उन्हें बीमारियों की चपेट में आने से बचाया जा सके।
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