फर्जी मतदान और मतगणना में धांधली को लेकर कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन
भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज़। जिले में पंचायत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब फर्जी मतदान व मतगणना में धांधली के आरोप लगने लगे हैं। इन्हीं आरोपों को लेकर पांसल, धूलखेड़ा (सुवाणा) , लुहारिया (मांडल) व बेरां ग्राम पंचायत के लोगों ने आज कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। पांसल के पूर्व सरपंच छोटू जाट, धूलखेड़ा के सरपंच प्रत्याशी गोपाल गुर्जर, लुहारिया के सरपंच प्रत्याशी मुस्तफा खान पठान, बेरां (बनेड़ा) के सुखदेव शर्मा व उपरेड़ा (बनेड़ा) की सरोज कंवर ने ग्रामीणों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी के नाम ज्ञापन देकर जांच करवा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कांग्रेस नेता धनराज गुर्जर भी मौजूद रहे।
लुहारिया पंचायत के सरपंच प्रत्याशी मुस्तफा खान पठान ने सरपंच चुनाव में फर्जी मतदान, राजनीतिक दबाव और मतगणना में भारी धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं। पठान और ग्रामीणों ने जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चुनाव को निरस्त कर पुन: मतदान कराने तथा नवनिर्वाचित सरपंच को पदभार ग्रहण न कराने की मांग की है। लुहारिया में 24 अक्टूबर को सरपंच के लिए मतदान हुआ था। आरोप है कि विरोधी पक्ष के प्रत्याशी मणिराज सिंह ने स्थानीय राजनीतिक पहुंच और विधायक के करीबी होने का लाभ उठाते हुए पोलिंग पार्टी से मिलीभगत की। मुस्तफा का आरोप है कि शुरुआती गिनती में उन्हें 50 से अधिक मतों से विजयी घोषित किया गया था। बाद में पुन: मतगणना कराकर उन्हें 16 मतों से हरा दिया गया। खारिज मतपत्रों को दिखाने की मांग करने पर भी उन्हें नहीं दिखाया। वैध मतों को विरोधी के पक्ष में डालने का प्रयास किया गया। मतदान केंद्र और मतगणना स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे पोलिंगकर्मियों द्वारा बंद करा दिए। मुस्तफा और ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करा लुहारिया पंचायत चुनाव को निरस्त कर पुनर्मतदान कराया जाए। नवनिर्वाचित सरपंच को पदभार ग्रहण न करने दिया जाए। इसी तरह अन्य पंचायतों के प्रत्याशियों ने भी चुनाव में गड़बडिय़ों के आरोप लगाकर निष्पक्ष जांच व पुनर्मतदान व मतगणना की मांग की।
इनका कहना है...
पांसल में सरपंच चुनाव के दौरान पारदर्शिता नहीं रखी गई। पोलिंग अधिकारी ने रिकाउंटिंग से मना कर दिया। इसके बाद अगले दिन कुछ जले हुए बैलेट पेपर का वीडियो भी वायरल हुआ। मतदान के दौरान पड़े मतों की पुन: गणना की जाए। जो वोट पड़े, उनकी पर्ची दिखाई जाएं।
- छोटू जाट, पूर्व सरपंच, पालड़ी
हमारी 118 वोटों से जीत घोषित कर दी। फिर तहसीलदार आए और बोला कि आप 65 वोट से हार गए। हमारे से जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। जिला निर्वाचन अधिकारी से मांग है कि हमें एक-एक वोट की पर्ची दिखा दी जाए। वरना हम जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे।
- गोपाल गुर्जर, धूलखेड़ा
भीलवाड़ा जिले में ऐसे कई सरपंच प्रत्याशी थे, जो जीते हुए थे। उन्हें रीकाउंटिंग कराकर हराने का काम किया। इन्होंने पहले ही किस पोलिंग पार्टी को भेजना, किसे हराना-किसे जिताना, ये तय कर लिया था। इन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है। ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
- धनराज गुर्जर, कांग्रेस नेता
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