शास्त्री नगर में ब्यूटी सैलून की छत ढही, बाल-बाल बचे पांच कार्मिक
- लाखों रुपए का सामान मलबे में दबकर खराब - मरम्मत के लिए यूआईटी ने नहीं दी अनुमति
भीलवाड़ा लोकजीवन न्यूज। शहर के व्यस्ततम शास्त्री नगर क्षेत्र में बैंक ऑफ इंडिया के सामने गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चालू ब्यूटी सैलून की जर्जर छत अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। दिवाली के त्योहार के कारण सैलून में ग्राहकों और महिला कर्मचारियों की खासी मौजूदगी थी। गनीमत रही कि भारी मलबा गिरने के बावजूद किसी को गंभीर चोट नहीं आई और सभी की जान बाल-बाल बच गई। हादसे के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया और नगर विकास न्यास (यूआईटी) की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश फूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त सनशाइन फैमिली ब्यूटी सैलून में सामान्य दिनों से अधिक चहल-पहल थी। दिवाली के चलते महिलाएं सजने-संवरने के लिए आई हुई थीं और सैलून कर्मी अपने काम में व्यस्त थीं। इसी दौरान छत से अचानक प्लास्टर गिरा और देखते ही देखते पुरानी पट्टियां चरमराते हुए नीचे आ गिरीं। धमाके की आवाज और धूल के गुबार के बीच सैलून में चीख-पुकार मच गई। अंदर मौजूद महिलाएं और ग्राहक जान बचाने के लिए बदहवास होकर बाहर की ओर भागे। हालांकि मलबे की चपेट में आने से कुछ लोगों को हल्की खरोंचें जरूर आईं, लेकिन समय रहते बाहर निकल जाने से एक बड़ा और दर्दनाक हादसा टल गया। घटना के बाद आसपास के दुकानदार व राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।
यूआईटी की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
सैलून के रौनक सेन और राजेंद्र सेन ने बताया कि यह दुकान यूआईटी द्वारा वर्ष 1982 में आवंटित की गई थी। चार दशक पुरानी यह इमारत लंबे समय से जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी थी। दुकानदारों का आरोप है कि छत की मरम्मत और नवीनीकरण की अनुमति के लिए कई बार नगर विकास न्यास कार्यालय के चक्कर काटे गए। दुकानदारों ने बताया कि मरम्मत और पट्टा सुधार के लिए यूआईटी में बार-बार फाइलें लगाई गईं और लिखित आवेदन दिए गए। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभाग की सुस्ती के चलते न तो मरम्मत की आधिकारिक अनुमति दी गई और न ही पट्टा सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। प्रशासनिक अनदेखी के कारण आखिरकार यह ढांचा ढह गया।
पानी की टंकी का भार नहीं सह सकीं पुरानी पट्टियां
घटना के तकनीकी कारणों पर नजर डालें तो जर्जर छत पर रखी पानी की टंकी हादसे का मुख्य कारण बनी। छत की पट्टियां दशकों पुरानी और कमजोर हो चुकी थीं। छत पर रखी भारी पानी की टंकी के अत्यधिक भार और पानी के संभावित रिसाव को पुरानी पट्टियां सहन नहीं कर सकीं और अचानक टूटकर नीचे आ गिरीं।
लाखों का सामान मलबे में दबा, रो-रोकर बुरा हाल
छत गिरने से सैलून के अंदर रखा कीमती फर्नीचर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ब्यूटी केयर मशीनें और कॉस्मेटिक्स का पूरा नया स्टॉक भारी मलबे के नीचे दब गया। त्योहारी सीजन के चलते सैलून में व्यापक स्तर पर कॉस्मेटिक उत्पादों का स्टॉक मंगाया गया था, जो पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस हादसे में लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। सैलून संचालक और वहां कार्यरत महिला कर्मियों की रोजी-रोटी का साधन छिन जाने से उनका रो-रोकर बुरा हाल है। त्योहार के ऐन वक्त पर हुई इस क्षति ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
पट्टा सुधार और मुआवजे की मांग
घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और पीडि़त दुकानदारों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। दुकानदारों का कहना है कि शहर में यूआईटी द्वारा दशकों पूर्व आवंटित कई व्यावसायिक संपत्तियां अब जर्जर हाल में हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि दुकानदार को हुए भारी आर्थिक नुकसान का तत्काल सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए। जर्जर हो चुकी इन दुकानों के पट्टों का शीघ्र नवीनीकरण व सुधार किया जाए। नियमानुसार दुकानदारों को समयबद्ध तरीके से मरम्मत कार्य कराने की अनुमति दी जाए, ताकि भविष्य में किसी जानलेवा हादसे को टाला जा सके।
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