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- हजारों श्रमिक लाभ से वंचित
- इलाज और पंजीकरण दोनों अटके
भीलवाड़ा लोकजीवन। ईएसआईसी पोर्टल पर लगातार आ रही तकनीकी समस्याओं के कारण बीमाकृत व्यक्तियों (आईपी) के नंबर जनरेट नहीं हो पा रहे हैं, जिससे श्रमिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या पिछले कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ईएसआईसी पोर्टल के सुचारू रूप से कार्य नहीं करने के कारण नए श्रमिकों का पंजीकरण अटक गया है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि आईपी नंबर नहीं बनने से श्रमिक और उनके परिजन चिकित्सा सुविधा और दवा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। कई मामलों में श्रमिक अस्पताल पहुंचे, लेकिन पहचान संख्या नहीं होने के कारण उन्हें उपचार नहीं मिल सका। नियोक्ताओं को भी इस तकनीकी खामी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। समय पर पंजीकरण नहीं हो पाने से उन पर कानूनी कार्रवाई और पेनल्टी का खतरा मंडरा रहा है। कार्यालयों में बार-बार ईएसआईसी पोर्टल पर एरर आने से कर्मचारियों का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और रोजमर्रा की प्रक्रिया ठप हो गई है। जानकारों के अनुसार पोर्टल पर ‘फॉर्म सबमिट’ करते समय लगातार फेल होने की शिकायत सामने आ रही है। कई बार डाटा भरने के बाद भी सिस्टम उसे स्वीकार नहीं कर रहा, जिससे कर्मचारियों और श्रमिकों दोनों का समय और श्रम व्यर्थ जा रहा है। इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने विभागीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी सुधार शीघ्र नहीं किया गया तो हजारों श्रमिक स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा लाभ से वंचित रह जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ वैकल्पिक मैनुअल व्यवस्था भी अस्थायी रूप से लागू की जानी चाहिए, ताकि श्रमिकों को जरूरी सेवाओं से वंचित न होना पड़े। जनहित में मांग की जा रही है कि विभाग इस तकनीकी खामी का शीघ्र समाधान करे और पोर्टल को पूर्ण रूप से सुचारू किया जाए, ताकि श्रमिकों को उनका वैधानिक अधिकार समय पर मिल सके। मालूम हो की आईपी नंबर जनरेट नहीं हो पा रहे, श्रमिकों को इलाज नहीं मिल पा रहा, नियोक्ताओं पर पेनाल्टी का खतरा, कार्यालयों का कामकाज बाधित, रोजाना सैकड़ों आवेदन अटक रहे है।
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