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खामोशी को मिलेगी आवाज, क्लासरूम तक पहुंचा हियरिंग केयर - भीलवाड़ा के स्कूलों में 1000 बच्चों जांच
By Lokjeewan Daily - 04-02-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन । खामोशी में जी रहे बच्चों को अब आवाज मिलने जा रही है। बच्चों में सुनने की अक्षमता को समय रहते पहचानने और उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महात्मा गांधी चिकित्सालय, भीलवाड़ा के नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग द्वारा एक व्यापक श्रवण जांच अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय के माध्यम से राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार संचालित किया जा रहा है। एमजीएच ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. लीना जैन ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बचपन में होने वाली श्रवण हानि की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करना है, ताकि बच्चों को भविष्य में होने वाली शैक्षणिक और सामाजिक समस्याओं से बचाया जा सके। इसके लिए भीलवाड़ा जिले के 5 प्रमुख सरकारी व निजी विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां लगभग 1000 विद्यार्थियों की कान जांच की जा रही है। अभियान के तहत स्कूलों में कक्षा-कक्ष तक पहुंचकर बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जांच के दौरान प्राप्त सभी आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसके परिणामों को आगामी 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किया जाएगा। डॉ. जैन ने बताया कि जिन बच्चों में सुनने की समस्या पाई जाएगी, उनके अभिभावकों को तुरंत सूचित किया जाएगा तथा उन्हें उचित परामर्श और आगे के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर बच्चों को विशेष परीक्षण एवं हियरिंग एड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।  यह अभियान 21 जनवरी से प्रारंभ हुआ है और 9 फरवरी तक चलेगा। अब तक बचपन स्कूल, महेश पब्लिक स्कूल, नारायण स्कूल और संगम स्कूल में स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है। वर्तमान में सरकारी विद्यालयों में जांच की जा रही है। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ विशेषज्ञ (एसोसिएट प्रोफेसर) के नेतृत्व में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों का भी इस अभियान को भरपूर सहयोग मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में श्रवण समस्या की पहचान न होने पर बच्चों के बोलने, सीखने और आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस अभियान से न केवल बच्चों का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित होगा। 

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