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भीलवाड़ा लोकजीवन। जिले के सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम नौगांवा में रविवार को महाशिवरात्रि पर भक्ति और दर्शन का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था श्री सांवरिया सेठ के ‘हरिहर’ स्वरूप के विशेष श्रृंगार का, जिसने न केवल श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, बल्कि वैष्णव और शैव मतों की अटूट एकता का संदेश भी दिया। मंदिर समिति द्वारा आयोजित इस विशेष झांकी के दर्शन के लिए अलसुबह से ही समूचे क्षेत्र में भारी उत्साह देखा गया और देखते ही देखते भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर में सांवरिया सेठ का विग्रह रविवार को दिव्य आभा से दमक रहा था। शास्त्रों के अनुसार 'हरि' यानी भगवान विष्णु और हरी यानी महादेव। इसी अवधारणा को साकार करते हुए भगवान के विग्रह का विशेष श्रृंगार किया गया। विग्रह के दाहिने हिस्से में महादेव का स्वरूप झलका, जहाँ त्रिशूल और बाघ की खाल जैसे प्रतीकों ने भक्तों को शिवभक्ति में सराबोर किया। वहीं, बाएं हिस्से में भगवान विष्णु का मनोहारी रूप नजर आया, जिसमें शंख, चक्र और भव्य मुकुट के साथ अलौकिक श्रृंगार किया गया। शंकरनारायण और शिवकेशव के इस सम्मिलित स्वरूप ने श्रद्धालुओं को यह अनुभव कराया कि सृष्टि की सर्वो‘च सत्ता वास्तव में एक ही है। विशेष कारीगरों की कड़ी मेहनत से तैयार इस नयनाभिराम श्रृंगार को निहारने के लिए न केवल भीलवाड़ा शहर, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त नौगांवा पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर 'सांवरिया सेठ के जयकारों' और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान रहा। मंदिर समिति के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने इस अवसर पर आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि सांवरिया सेठ का यह हरिहर रूप हमें सिखाता है कि भक्ति के मार्ग भले ही अलग हों, लेकिन सबका गंतव्य एक है। आज का यह विशेष आयोजन विश्व कल्याण और सामाजिक समरसता की भावना को समर्पित रहा। उत्सव के दौरान विशेष भोग लगाया गया और महाआरती की गई, जिसमें भक्तों ने भावविभोर होकर भाग लिया। पूरे गर्भगृह को देशी सुगंधित फूलों से सजाया गया था, जिससे वातावरण अत्यंत सुगंधित और दिव्य हो गया। दर्शनार्थियों के लिए मंदिर कमेटी द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए थे और देर शाम तक सैकड़ो भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। सुरक्षा और सुचारू दर्शन के लिए भी मंदिर प्रशासन मुस्तैद नजर आया। 18 फरवरी को मंदिर में भागवत समरसता महोत्सव के संबंध में बैठक का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव 27 मार्च को जोधपुर के गोवत्स श्री राधा कृष्ण जी महाराज के सानिध्य में होने जा रहा है।
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