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भीलवाड़ा लोकजीवन। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा तहसील में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। बामनिया गांव में सैकड़ों बीघा चारागाह भूमि से लाखों 'विलायती बबूल' सहित अन्य कीमती पेड़ों के अवैध कटान व उनसे कोयला बनाने के गंभीर प्रकरण में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले को पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय संयुक्त जांच समिति का गठन कर दिया है। इसके अलावा कलेक्टर सही तो सात जनों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरा मामला बामनिया ग्राम पंचायत क्षेत्र की सरकारी और चारागाह भूमि से जुड़ा है, जहाँ करीब 2000 बीघा में फैले लाखों विलायती बबूलों को बिना किसी वैध नीलामी के काट दिया गया। स्थानीय स्तर पर की गई शिकायतों में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर करीब 25 लाख रुपये से अधिक की सरकारी वन संपदा को नुकसान पहुँचाया है। इन पेड़ों को काटकर बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से कोयला भट्ठियां संचालित की जा रही थीं, जिससे स्थानीय पर्यावरण को भारी क्षति पहुँची है। मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और माननीय डॉ. सुधीर कुमार चतुर्वेदी (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ द्वारा की गई। प्रकरण में फरियादी शिवराज कुमावत एवं अन्य की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता लोकेंद्र सिंह कछावा ने ट्रिब्यूनल को बताया कि बामनिया में बिना किसी सक्षम अधिकारी (कलेक्टर या तहसीलदार) की अनुमति के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई। न्यायालय के समक्ष यह दलील भी दी गई कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत ने किसी भी प्रकार की नीलामी से स्पष्ट इनकार किया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। साथ ही, विलायती बबूल की आड़ में नीम और खेजड़ी जैसे संरक्षित और महत्वपूर्ण पेड़ों को भी व्यावसायिक लाभ के लिए काटकर नष्ट कर दिया गया। मामले की गंभीरता और उठाए गए पर्यावरणीय मुद्दों को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि, वन संरक्षक भीलवाड़ा के प्रतिनिधि, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल होंगे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि यह समिति तत्काल विवादित स्थल का दौरा करेगी और 6 सप्ताह के भीतर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट व दोषियों पर की गई कार्रवाई का विवरण पेश करेगी। इस पूरी प्रक्रिया के समन्वय और लॉजिस्टिक सहायता के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, ट्रिब्यूनल ने राजस्थान सरकार सहित सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। पर्यावरण और सरकारी नियमों को ताक पर रखने वालों के खिलाफ इस सख्त आदेश के बाद अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च, 2026 को तय की गई है। यह आदेश उन तत्वों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है जो नियमों का उल्लंघन कर प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन कर रहे हैं।
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