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शीतला अष्टमी की धूम शुरू, घरों में शुरू हुआ रांधा पुआ, कल खेलेंगे रंग
By Lokjeewan Daily - 10-03-2026

- बाजारों में खाद्य सामग्री व रंग पिचकारी की खरीदारी जोरों पर
- आकरा वारÓ होने के कारण अष्टमी पूजन करना बुधवार को श्रेष्ठ


भीलवाड़ा लोकजीवन।  जिले के ग्रामीण अंचलों में मंगलवार को शीतला सप्तमी व अष्टमी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।  बनेड़ा और आस-पास के गांवों में मंगलवार को शीतला सप्तमी की पूजा अर्चना की गई, वहीं भीलवाड़ा शहर में बुधवार को शीतला अष्टमी का मुख्य आयोजन होगा। इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है, जो परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए माता शीतला की विशेष आराधना कर रही हैं। पर्व की पूर्व संध्या पर घरों में 'रांधा-पुआÓ की विशेष परंपरा निभाई जा रही है। इसके तहत महिलाएं रसोई में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन जैसे दही-चावल, ओलिया, घाट, राबड़ी और कुरकुरी पकौड़ियां तैयार कर रही हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला माता की पूजा में ताजे भोजन के बजाय एक दिन पहले बने 'ठंडे भोगÓ (बासौड़ा) का ही उपयोग किया जाता है। पूजा के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और परिवार के सभी सदस्य बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं।
शुभ मुहूर्त और पूजा विधान

ब्रह्म ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस बार सप्तमी को 'आकरा वारÓ होने के कारण अष्टमी (बुधवार) को पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित अशोक शर्मा के अनुसार, माता के पूजन के लिए प्रात: 6:55 से 9:25 बजे (लाभ व अमृत) और 11:20 से 12:50 बजे (शुभ वेला) का समय अति उत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में, यानी रात्रि 3 बजे के बाद से ही मंदिरों में महिलाओं की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं माता को जल अर्पित कर बासौड़ा का भोग लगाती हैं। 
दशा माता व्रत की तैयारी
शीतला अष्टमी के पश्चात शुक्रवार (दशमी) को 'दशा माताÓ का पर्व मनाया जाएगा। पंडित पीयूष शास्त्री ने बताया कि इसके पूजन का शुभ मुहूर्त प्रात: 6:55 से 11:20 बजे तक रहेगा। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर 10 कहानियां सुनती हैं और पीपल की पूजा कर सूत का डोरा बांधती हैं। यह व्रत घर की 'दशाÓ सुधारने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए किया जाता है।

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