It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

​शीतलाष्टमी पर बरसा फागुन का रंग: रंगों से सराबोर हुई भीलवाड़ा की सड़कें, चंग की थाप और डीजे के शोर में झूमा शहर
By Lokjeewan Daily - 11-03-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन (लोकेश सोनी) । टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में बुधवार को 'राधन' और आस्था के संगम के साथ रंगों का अनूठा उल्लास देखने को मिला। होली के ठीक आठ दिन बाद आने वाले शीतला अष्टमी (बासोड़ा) के पर्व पर पूरा शहर रंगों के समंदर में डूबा नजर आया। सुबह से ही क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या जवान, हर कोई बस एक ही धुन में था— 'बुरा न मानो होली है, आज तो शीतलाष्टमी है'।

​सुबह से ही सड़कों पर उतरा उत्साह का सैलाब

​सूरज की पहली किरण के साथ ही भीलवाड़ा की गलियों में रंग-गुलाल का दौर शुरू हो गया। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर तंग गलियों तक युवाओं की टोलियां 'हुरियारों' के रूप में निकल पड़ीं। जो भी सामने आया, वह रंगों से तरबतर हो गया। विशेष रूप से भीलवाड़ा में शीतला अष्टमी पर रंग खेलने की परंपरा होली जैसी ही जीवंत नजर आई। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी और सुख-समृद्धि की कामना की।

​डीजे की धमक और पक्के रंगों का क्रेज

​आधुनिकता के दौर में इस बार भी डीजे का क्रेज सर चढ़कर बोला। शहर के अनेक मोहल्लों में बड़े-बड़े साउंड सिस्टम लगाए गए, जहां राजस्थानी फाग गीतों और बॉलीवुड के रिमिक्स गानों पर युवा घंटों थिरकते रहे। खास बात यह रही कि इस बार केवल गुलाल ही नहीं, बल्कि लाल, काला, नीला और सिल्वर जैसे पक्के रंगों का भी जबरदस्त क्रेज देखा गया। युवाओं ने रंग-बिरंगे बालों वाली विग (टोपियां) पहनकर और चेहरों पर मुखौटे लगाकर उत्सव का आनंद लिया।

​कहीं पानी की बौछार, तो कहीं ढोल की थाप

​गर्मी के अहसास को कम करने के लिए कई जगह पानी के टैंकरों और ड्रमों की व्यवस्था की गई थी, जहां कलरफुल पानी की बौछारें की जा रही थीं। पुराने भीलवाड़ा के भीतरी इलाकों में संस्कृति का पारंपरिक रंग भी दिखा। वहां लोग ढोल की थाप पर लोकगीत गाते और एक-दूसरे पर प्रेम के व्यंग्य बाण छोड़ते नजर आए। वहीं, शहर के बाहरी इलाकों में स्थित फार्म हाउस और रिसॉर्ट्स में भी 'कलर पार्टी' का आयोजन हुआ, जहां सशुल्क प्रवेश के बावजूद भारी भीड़ उमड़ी।

​ठंडे व्यंजनों का लगा भोग, महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

​एक ओर जहां सड़कों पर हुड़दंग और मस्ती थी, वहीं दूसरी ओर घरों में आस्था का माहौल रहा। अलसुबह महिलाओं ने शीतला माता के मंदिरों में जाकर ठंडे व्यंजनों (बासोड़ा) का भोग लगाया। घरों में बने ठंडे ओलिया, राबड़ी, पुए और पकौड़ों का आनंद लिया गया। मान्यता के अनुसार, आज के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है, इसलिए बासी भोजन को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण कर माता शीतला से आरोग्य का वरदान मांगा गया।

​सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

​हुड़दंग और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस जाब्ता तैनात रहा, जो हुड़दंगियों पर पैनी नजर रखे हुए था। दोपहर बाद तक चले इस रंगारंग उत्सव के बाद शाम को लोग नए वस्त्र पहनकर एक-दूसरे के घर जाकर 'रामा-श्यामा' कर  बड़ों का आशीर्वाद लेंगे।

अन्य सम्बंधित खबरे