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- चैत्र दशमी पर गूंजी नल-दमयंती की कथा
- परम्परागत ढंग से मनाया दशा माता पर्व
भीलवाड़ा लोकजीवन। शहर से लेकर गांवों तक आज दशा सुधारने और खुशहाली की कामना के साथ दशा माता का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास से मनाया गया। अलसुबह से ही पीपल के वृक्षों के नीचे महिलाओं का तांता लगा रहा, जहाँ बुधादित्य और रवि योग के विशेष संयोग ने इस पूजन के फल को और भी खास बना दिया। भीलवाड़ा के प्रमुख मंदिरों और मोहल्लों में स्थित पीपल के वृक्षों को महिलाओं ने कुमकुम, हल्दी और अक्षत से पूजा। कच्चे सूत के 10 धागों में 10 गांठें लगाकर विशेष डोरा तैयार किया गया, जिसे विधि-विधान के साथ गले में धारण किया गया। ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार उदया तिथि और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण पूजन का फल कई गुना बढ़ गया। महिलाओं ने प्रतिपदा से शुरू हुए इस 10 दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति आज दशमी पर की। व्रत के दौरान महिलाओं ने नमक का त्याग किया और गुड़ की लापसी का भोग लगाकर एक समय गेहूं का आहार ग्रहण किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, घर की साफ-सफाई के बाद नई झाड़ू की खरीद को लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना गया।
दोपहर तक मंदिरों में नल-दमयंती की कथा का वाचन हुआ, जिसमें संकट के बाद आए सुखद समय (दशा सुधार) के महत्व को बताया गया। गौरतलब है कि दशा माता का डोरा केवल धागा नहीं, बल्कि परिवार के सुरक्षा कवच और अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसे साल भर पहनकर समृद्धि की कामना की जाती है।
वद्र्धमान कॉलोनी में मनाया दशामाता पर्व
वर्धमान कॉलोनी में महिलाओं ने दशा माता पूजन किया। वीणा खटोड़ ने इस अवसर पर दशा माता की कहानी भी सुनाई और कहा कि घर में सुख समृद्धि के साथ पति और बच्चों की दीर्घायु व सुरक्षा की कामना भी की जाती है। पूजन में विजया सोमानी, रेणु चंडालिया, इंदिरा सोमानी, आरती खटोड़ आदि उपस्थित थी।