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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
भीलवाड़ा लोकजीवन। सर्राफा बाजार और गुलमंडी क्षेत्र में आज उस समय इतिहास जीवंत हो उठा, जब जीनगर समाज द्वारा पारंपरिक कोडामार होली का भव्य आयोजन किया गया। लगभग 200 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस परंपरा ने एक बार फिर आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती का अहसास कराया। रंगतेरस के पावन अवसर पर आयोजित इस उत्सव की शुरुआत सुबह 10 जे जीनगर समाज भवन से हुई। समाज के युवा और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए जुलूस के रूप में गुलमंडी पहुंचे। आयोजन का मुख्य आकर्षण देवर-भाभी के बीच होने वाली हंसी-ठिठोली और कोड़ों की मार रही। यह खेल न केवल मनोरंजन है, बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान और उनके सशक्त स्वरूप को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। मैदान के बीचों-बीच रंग से भरे बड़े-बड़े कड़ाव रखे गए थे। नियम के अनुसार, महिलाओं (भाभियों) ने हाथों में कपड़े के कोड़े लेकर कड़ावों के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बना लिया। वहीं, दूसरी ओर पुरुष (देवर) इस घेरे को तोडक़र कड़ाव के रंग को महिलाओं पर डालने का प्रयास कर रहे थे। जैसे ही कोई पुरुष घेरे के करीब आता, महिलाएं उन पर कोड़ों से प्रहार करतीं। इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए पूरे शहर से लोग उमड़ पड़े। जीनगर समाज समिति के अध्यक्ष कैलाश सांखला ने बताया कि यह आयोजन समाज की एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक दुर्गालाल सांखला, उपाध्यक्ष नाथूलाल पंवार व बंशी लाल बोराणा और कोषाध्यक्ष रमेश गोयल के नेतृत्व में पूरी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। मुकेश सिरोया, विजय डाबी और राजेश सांखला सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा। होली खेलने के पश्चात सभी समाज बंधु एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर गले मिले। कार्यक्रम का समापन सामूहिक स्नेह मिलन और सहभोज के साथ होगा। समाज के बड़े-बुजुर्ग युवा पीढ़ी को इस विरासत को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद देंगे।