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भीलवाड़ा लोकजीवन। मार्च का महीना शुरू होते ही मौसम के बदलते मिजाज ने आमजन की सेहत बिगाड़ दी है। कभी तीखी धूप तो कभी ठंडी हवाओं के कारण जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महात्मा गांधी चिकित्सालय में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है। पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) काउंटर पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो मुख्य गेट तक पहुंच रही हैं। यही स्थिति डॉक्टरों के चैंबर और दवा वितरण केंद्रों की भी है। कई मरीज जो सुबह जल्दी आते हैं, उन्हें भी डॉक्टर को दिखाने के लिए 2 से 3 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। भीड़ का आलम यह है कि जांच लैब और एक्स-रे रूम के बाहर भी मरीजों और परिजनों के बीच अपनी बारी को लेकर जद्दोजहद बनी हुई है।
वायरल और गैस्ट्रो का डबल अटैक
चिकित्सकों के अनुसार, इस समय ओपीडी में आने वाले 70 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, और गले के संक्रमण से पीडि़त हैं। वहीं, खान-पान में जरा सी लापरवाही के कारण पेट दर्द, उल्टी और दस्त (डायरिया) के मामलों में भी अचानक उछाल आया है। डॉक्टरों का कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे और बुजुर्ग इस बदलते मौसम की चपेट में सबसे तेजी से आ रहे हैं।
सीजनल शिफ्ट बना बीमारी का मुख्य कारण
वरिष्ठ चिकित्सकों का विश्लेषण है कि दिन में बढ़ती गर्मी और रात के समय गिरने वाले तापमान के कारण शरीर का तापमान संतुलित नहीं रह पाता। इसे ट्रांजिशन पीरियड कहा जाता है, जिसमें वायरस और बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। महात्मा गांधी चिकित्सालय के प्रशासन ने बताया कि हालांकि स्टाफ पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, लेकिन मरीजों की संख्या सामान्य से दोगुना होने के कारण भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विशेषज्ञों की सलाह, सावधानी ही बड़ा बचाव
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ ने बताया कि हल्का बुखार या जुकाम होने पर खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें। बाहर के कटे हुए फल, खुले खाद्य पदार्थ और ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करें। इस समय पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा रहता है, इसलिए उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। हाथों को बार-बार धोएं और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें।
धैर्य और सहयोग की अपील
डॉ. गौड़ ने मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की है। भीड़ अधिक होने के कारण इलाज में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन हर मरीज को गुणवत्तापूर्ण उपचार देना हमारी प्राथमिकता है। कतारों में अनुशासन बनाए रखने से चिकित्सा प्रक्रिया तेज हो सकती है।