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भीलवाड़ा लोकजीवन। ‘आज का कर्मचारी, कल का पेंशनर है’... इसी ध्येय वाक्य के साथ जिले के पेंशनर्स ने अपनी लंबित मांगों और 8वें वेतन आयोग में पेंशनर्स के साथ हो रहे भेदभाव के विरुद्ध हुंकार भरी है। राजस्थान पेंशनर समाज, जिला शाखा भीलवाड़ा के बैनर तले बुधवार को बड़ी संख्या में पेंशनर्स ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार द्वारा वित्त विधेयक 2025 के जरिए पेंशन नियमों में किए गए संशोधनों को ‘काला कानून’ बताते हुए पेंशनर्स ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और प्रधानमंत्री के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) को ज्ञापन सौंपा। पेंशनर समाज के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस निर्मल कुमार जैन ने बताया कि देशभर में पेंशनर्स आज काला दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि 25 मार्च 2025 को लोकसभा में पारित अधिनियम मौजूदा पेंशनर्स को अपूरणीय क्षति पहुँचा रहा है। यह कानून सर्वोच्च न्यायालय के नाकरा फैसले की भी अवहेलना करता है, जिसमें पेंशन को सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का आधार माना गया था। हमारी मांग है कि 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग की तरह समानता का सिद्धांत लागू किया जाए।
आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
महासचिव भूपेन्द्र दत्ता ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पेंशनर्स की जायज मांगों को अनसुना किया गया और भेदभावपूर्ण प्रावधान निरस्त नहीं हुए, तो राज्य स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुसार उग्र आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंशनर समुदाय अपने हक के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार है।
रैली के रूप में पहुंचे कलेक्ट्रेट
?इससे पूर्व, मुखर्जी उद्यान से बड़ी संख्या में पेंशनभोगी काली पट्टी बांधकर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारेबाजी कर रोष प्रकट किया गया। इस अवसर पर डॉ. फरियाद मोहम्मद, सत्यदेव व्यास, एसएल बिहानी, जनार्दन आचार्य, मोहम्मद असलम खान, कोषाध्यक्ष गोपाल गग्गड, जगदीश मुंदड़ा, श्याम सुंदर पारीक, प्रेम सिंह, रामनिवास छीपा सहित कई वरिष्ठ पेंशनर्स उपस्थित रहे।
पेंशनर्स ने यह रखी प्रमुख मांगे
8वें वेतन आयोग में पेंशन निर्धारण के भेदभावपूर्ण नियमों को तुरंत वापस लिया जाए। 01-01-2026 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनर्स के बीच समानता रखी जाए। वित्त विधेयक 2025 के उन प्रावधानों को रद्द किया जाए जो पेंशनर्स के वर्गीकरण में अंतर पैदा करते हैं।
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