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भीलवाड़ा लोकजीवन। विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर रसधारा सांस्कृतिक संस्थान के साक्षात सभागार में रंगकर्मियों द्वारा गोष्ठी एवं नाट्य अभ्यास का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सभागार में नाट्य रस की सजीव धारा बहती नजर आई और रंगमंच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं रसधारा के संस्थापक गोपाल जी आचार्य ने अपने विचार रखते हुए रंगमंच की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वहीं राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर अनुराग सिंह राठौड़ एवं रवि ओझा ने अपने रंगमंचीय अनुभव युवा कलाकारों के साथ साझा किए। कार्यक्रम में शहर के विख्यात कार्टून आर्टिस्ट जी. कदम ने रंगमंच की सार्थकता पर अपने विचार व्यक्त किए। चर्चा में देवराज पुरोहित, कुलदीप सिंह, दुश्यंत हरित व्यास, दिनेश चौधरी, शिवांगी बैरवा, अनिमेष आचार्य, विभूति चौधरी, प्रभुलाल प्रजापत, अंकित शाह, दीपक, अंजू शर्मा, गरिमा पंचोली, आशीष एवं राहुल सहित कई रंगकर्मियों ने भागीदारी निभाई। गोष्ठी के पश्चात अनुराग सिंह के निर्देशन में नाटक "कठपुतलियां" का रिहर्सल भी किया गया। यह नाटक पूर्व में जोधपुर में आयोजित भारत रंग महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय नाट्य समारोह में मंचित हो चुका है। आगामी 31 मार्च को बीकानेर के अमर कला महोत्सव में शाम 7.30 बजे टीएम ऑडिटोरियम, गंगाशहर में इसका मंचन किया जाएगा। रसधारा की टीम 30 मार्च को बीकानेर के लिए प्रस्थान करेगी और मंचन के बाद 1 अप्रैल को पुन: भीलवाड़ा लौटेगी। कार्यक्रम ने शहर के रंगमंच प्रेमियों को नई ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।