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- फिरौती बटोरने वाला गैंग के अब चैट खोलेंगे राज
- बीट कांस्टेबल की सतर्कता से ढहा है सिंडिकेट का किला
भीलवाड़ा लोकजीवन । वस्त्र नगरी के धरातल से निकलने वाला गारनेट अब अपराध की नई इबारत लिख रहा है। जिले के कोटड़ी, बीगोद और जहाजपुर इलाकों में सक्रिय एक शातिर वसूली माफिया सिंडिकेट के भंडाफोड़ ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर भी भूचाल ला दिया है। इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने ट्रेनी आईपीएस और पुलिस उप अधीक्षक (सदर) माधव उपाध्याय को एपीओ कर दिया है। इसे विभाग की अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक सर्जरी माना जा रहा है।
रसूख की आड़ में मशीन टैक्स का आतंक
जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना अजय पांचाल अपने साथियों नंदसिंह उर्फ पिंटू सिंह, नारायण गुर्जर और कालू गुर्जर के साथ मिलकर एक संगठित साम्राज्य चला रहा था। यह गिरोह उन लोगों को निशाना बनाता था जो प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध रूप से गारनेट खनन का काम करते थे। खुद को जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का प्रतिनिधि बताकर अजय पांचाल ने इलाके में खौफ पैदा कर रखा था। आरोपी ने अपनी काली स्कॉर्पियो पर विधायक की सफेद फॉर्च्यूनर जैसा ही नंबर लगवा रखा था, ताकि पुलिस और आम जनता उसे विधायक का ही आदमी समझे। इस रसूख के दम पर गिरोह ने खनन माफियाओं से 30 हजार रुपये प्रति मशीन की दर से मशीन टैक्स वसूलना शुरू कर दिया। जो पैसे नहीं देता, उसे पुलिस और कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर डराया जाता था।
खाकी की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध रही है। बताया जा रहा है कि ट्रेनी आईपीएस माधव उपाध्याय की कार्यप्रणाली और आरोपियों के साथ उनकी कथित नजदीकियों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक पहुंची थी। डीजीपी के निर्देश पर जीआरपी एसपी को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि कॉल डिटेल और व्हाट्सएप चैट की जांच गहराई से हुई, तो कई अन्य पुलिसकर्मियों की वर्दी पर भी दाग लग सकते हैं।
बीट कांस्टेबल की सतर्कता ने खोला राज
इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का पर्दाफाश किसी बड़े अधिकारी की रेड से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर तैनात बीट कांस्टेबलों की सजगता से हुआ है। कांस्टेबल अर्जुन राम, महेंद्र, मुकेशऔर लक्ष्मण ने गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखी और उच्चाधिकारियों को पुख्ता इनपुट दिए। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर चारों आरोपियों को धर दबोचा।
इतिहास खंगाला तो निकले हिस्ट्रीशीटर
गिरफ्तार आरोपियों का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है। नंदसिंह उर्फ पिंटू सिंह यह पुराना हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर चोरी, राजकार्य में बाधा और अवैध खनन के कई मामले पहले से विचाराधीन हैं। अजय पांचाल सिंडिकेट का मास्टरमाइंड, जो रसूख की आड़ में वसूली का जाल बुनता था। कालू गुर्जर इसके खिलाफ मारपीट और चोरी के आधा दर्जन मामले दर्ज हैं।
व्हाट्सएप चैट खोलेंगे पर्दे के पीछे के राज
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेज रही है। विशेष टीम अजय पांचाल के व्हाट्सएप चेट और पिछले छह महीनों की कॉल डिटेल खंगाल रही है। पुलिस को संदेह है कि इस वसूली के खेल का पैसा केवल इन चार लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका एक हिस्सा कुछ सफेदपोशों और प्रशासनिक कारिंदों तक भी पहुंचता था। उधर इस सबंध में जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा का कहना है कि अजय पांचाल केवल एक कार्यकर्ता के तौर पर मुझसे जुड़ा था। उसने अवैध खनन की सूचनाएं दी थीं, जिस पर कार्रवाई भी हुई। मेरा उससे कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक वास्ता नहीं है। अगर वह दोषी है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के आधार पर पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस चारों आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेगी।
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