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अतिक्रमण हटाते वक्त युवक की हाइड्रो गिरने से मौत, मुआवजे की मांग को लेकर मोर्चरी पर प्रदर्शन
By Lokjeewan Daily - 09-04-2026

- मौत के बाद परिजनों में कोहराम 
- प्रशासन की सख्ती से मौत का आरोप
भीलवाड़ा लोकजीवन।  शहर के गांधीनगर थाना क्षेत्र में नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान बुधवार को एक दर्दनाक हादसे में तब्दील हो गया। पंासल चौराहा इलाके में चल रही कार्रवाई के दौरान 23 वर्षीय युवक महावीर सैन की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अचानक हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अभियान के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। जानकारी के अनुसार महावीर सैन, पुत्र गणपत लाल सैन, पुलिस लाइन के पीछे का निवासी था। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान अपनी केबिन जब्त होने के डर से वह खुद ही उसे हाइड्रो मशीन की मदद से हटाने लगा। इसी दौरान संतुलन बिगड़ गया और भारी केबिन सीधे उसके सिर पर आ गिरी। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोग सहम गए। आनन-फानन में घायल महावीर को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की असमय मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, वहीं पूरे क्षेत्र में गहरा आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती और दबाव के कारण युवक ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया, जो उसकी जान पर भारी पड़ गया। घटना के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया।
मुआवजे की मांग को लेकर मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन
गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में समाजजन और परिजन जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर एकत्रित हो गए और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई। साथ ही घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की गई। प्रदर्शन के चलते अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
मांगें नहीं मानी तो होगा उग्र आंदोलन
समाजजनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाइश देने में जुटे हैं। यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि प्रशासनिक कार्यवाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।  

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