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डिस्काउंट के फेर में ‘खतरे’ की होम डिलीवरी, मोबाइल से दवा मंगवाना पड़ सकता है भारी
By Lokjeewan Daily - 21-04-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन।  शहर के दवा बाजार में इन दिनों एक खामोश लेकिन गंभीर जंग चल रही है। एक तरफ वर्षों से भरोसा कायम किए हुए स्थानीय मेडिकल स्टोर हैं, तो दूसरी ओर मोबाइल स्क्रीन पर 25 से 30 प्रतिशत तक के भारी-भरकम डिस्काउंट के साथ तेजी से उभरती ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां। पहली नजर में यह सुविधा सस्ती और आसान लगती है, लेकिन ‘पत्रिका’ की ग्राउंड रिपोर्ट ने इसके पीछे छिपे कई खतरनाक पहलुओं को उजागर किया है। कई मामलों में यह सुविधा मरीजों के लिए राहत के बजाय जोखिम बनती जा रही है। जांच में सामने आया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी ठोस फिजिकल वेरिफिकेशन के सिर्फ पर्चे की फोटो के आधार पर दवाइयां घर तक पहुंचाई जा रही हैं। कई बार यह फोटो धुंधली या एडिट की हुई होती है, फिर भी ऑर्डर स्वीकार कर लिया जाता है। यह प्रक्रिया सीधे तौर पर दवा बिक्री से जुड़े नियमों की अनदेखी है और इससे मरीजों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। नियमों के अनुसार, शेड्यूल-एच श्रेणी की दवाएं बिना मूल पर्चे के नहीं दी जा सकतीं। लेकिन ऑनलाइन माध्यम में यह नियम महज औपचारिकता बनकर रह गया है। स्थानीय केमिस्ट जहां पर्चे की गहराई से जांच करते हैं और जरूरत पडऩे पर मरीज को सलाह भी देते हैं, वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए यह सिर्फ एक डिजिटल ऑर्डर है। इस लापरवाही के कारण गलत दवा मिलने या दवा के दुरुपयोग की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। सबसे गंभीर चिंता कोल्ड चेन से जुड़ी दवाओं को लेकर सामने आई है। इंसुलिन, वैक्सीन और कई जीवनरक्षक दवाओं को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखना अनिवार्य होता है। लेकिन भीलवाड़ा की 35 से 42 डिग्री की गर्मी में इन दवाओं को सामान्य कूरियर बैग में डिलीवर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोल्ड चेन टूट जाती है तो दवा का रासायनिक संतुलन बिगड़ जाता है और वह असरहीन या खतरनाक हो सकती है। ऐसे में मरीज को फायदा मिलने के बजाय गंभीर साइड इफेक्ट या अंगों को नुकसान तक हो सकता है। इसके अलावा, ऑनलाइन दवाओं की सप्लाई चेन में पारदर्शिता की भी भारी कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस माध्यम से मिलने वाली दवाओं में नकली या निम्न गुणवत्ता की दवाओं का जोखिम भी बना रहता है। सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की है। यदि किसी मरीज को दवा से रिएक्शन होता है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आमतौर पर केवल रिफंड देकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलते हैं। इसके विपरीत, स्थानीय मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट की सीधी जवाबदेही होती है और मरीज को तुरंत मार्गदर्शन भी मिलता है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाओं के बीच तुलना करें तो जहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अधिक डिस्काउंट का लालच देते हैं, वहीं स्थानीय स्टोर दवाओं की गुणवत्ता, सही भंडारण और तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। इमरजेंसी की स्थिति में भी स्थानीय दुकानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, जबकि ऑनलाइन डिलीवरी में समय लग सकता है। भीलवाड़ा ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि दवाओं को किसी सामान्य उत्पाद की तरह नहीं बेचा जाना चाहिए। दवा केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि मरीज के जीवन से जुड़ा संवेदनशील विषय है। स्थानीय फार्मासिस्ट न केवल दवा उपलब्ध कराते हैं, बल्कि उसे लेने का सही तरीका, समय और सावधानियां भी बताते हैं, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में संभव नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सस्ते के चक्कर में अपनी सेहत से समझौता न करें। प्रशासन को भी चाहिए कि वह ऑनलाइन दवा वितरण प्रणाली की सख्ती से निगरानी करे और डिलीवरी के दौरान स्टोरेज व नियमों की जांच सुनिश्चित करे। थोड़ी सी बचत के लिए बड़ा जोखिम उठाना समझदारी नहीं है, क्योंकि सेहत से बड़ा कोई सौदा नहीं होता।

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