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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
- कलेक्ट्रेट पर गरजे दवा व्यापारी:
- सूचना केंद्र से निकाली आक्रोश रैली
भीलवाड़ा लोकजीवन अखिल भारतीय औषधि विक्रे ता संगठन एवं राजस्थान दवा विक्रेता गठबंधन के आह्वान पर बुधवार को जिले भर के दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखकर राष्ट्रयापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल रखी। यह विरोध प्रदर्शन अवैध एवं अनियंत्रित इंटरनेट के माध्यम से दवा बिक्री तथा आम जनता के स्वास्थ्य के साथ-साथ लाखों छोटे दवा विक्रेताओं के रोजगार पर मंडरा रहे संकट के खिलाफ किया गया। भीलवाड़ा शहर के अलावा तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद रख आंदोलन को ऐतिहासिक समर्थन दिया। जिला केमिस्ट संस्थान अध्यक्ष पवन व्यास एवं सचिव राकेश काबरा ने बताया कि शहर में सुबह 9 बजे से ही सभी दवा विक्रेता सूचना केंद्र के सामने एकत्रित होना शुरू हो गए। यहां से सुबह 10.30 बजे व्यापारियों ने एक विशाल आक्रोश रैली निकाली, जो स्टेशन चौराहा होते हुए जिला कलेक्ट्रेट पहुंची। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित एक विस्तृत मांग पत्र एडीएम सिटी प्रतिभा देवठिया सरकार को भेजा गया। कलेक्ट्रेट के पास स्थित मुखर्जी उद्यान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संभाग अध्यक्ष: दिनेश गोधा सहित पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए और दवा नीति पर चिंता जताई। इस दौरान रजत अग्रवाल, विनीत नागौरी, प्रीतम काबरा, पवन छापरवाल, भारत सोनी आदि मौजूद रहे।
मांग पत्र में उठाए गए तीन मुख्य बिंदु
ने बताया कि मांग पत्र में इंटरनेट के माध्यम से दवाओं की अवैध और नियम विरुद्ध बिक्री पर तुरंत रोक लगे। बिना पर्ची के दवाओं की आपूर्ति: बिना वैध और सत्यापित डॉक्टर के पर्चे के दवाओं की घर-पहुंच सेवा (होम डिलीवरी) को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।बड़े इंटरनेट मंचों द्वारा दी जा रही भारी छूट की अस्वस्थ नीति को बंद किया जाए, जिससे छोटे और अनुज्ञप्तिधारी केमिस्ट गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
सरकारी प्रस्तावों को वापस लेने की मांग
दवा विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि शासकीय संकल्प संख्या जी.एस.आर. 817(ई) एवं जी.एस.आर. 220(ई) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। इन नियमों का दुरुपयोग विभिन्न इंटरनेट मंचों और त्वरित वाणिज्यिक संचालकों द्वारा दवाओं की अनियंत्रित और असुरक्षित आपूर्ति के लिए किया जा रहा है।
महामारी के योगदान को न भूले सरकार
संगठन के पदाधिकारियों ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु या किराना का सामान नहीं हैं। उचित जांच-परख के बिना इनकी बेलगाम इंटरनेट बिक्री जन स्वास्थ्य, रोगियों की सुरक्षा और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट) के तहत बनाई गई विनियामक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। व्यापारिक प्रतिनिधियों ने याद दिलाया कि वैश्विक महामारी (कोविड) के संकट काल में इन्हीं दवा विक्रेताओं ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (फ्रंटलाइन वर्कर्स) के रूप में अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता तक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की थी। इसके बावजूद, अवैध इंटरनेट गतिविधियों के खिलाफ बार-बार सबूत देने पर भी संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
जिले भर में दिखा बंद का व्यापक असर
हड़ताल के दौरान भीलवाड़ा शहर के अलावा गुलाबपुरा, जहाजपुर, बिजौलिया, आसींद, कोटड़ी, हम्मीरगढ़, शाहपुरा और मांडलगढ़ आदि सभी प्रमुख कस्बों में भी दवा बाजार पूरी तरह बंद रहे और स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए। हालांकि, इस दौरान मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखते हुए दवा विक्रेता संस्थान द्वारा गंभीर रूप से बीमार और आपातकालीन श्रेणी के जरूरतमंद मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था भी की गई। संपूर्ण जिले में यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा।
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