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भीलवाड़ा लोकजीवन। राजस्थान के ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में डिलीवरी (प्रसव) के दौरान महिलाओं को लगाए जाने वाले एक अत्यंत महत्वपूर्ण इंजेक्शन ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5 एमएल की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि मैसर्स जैक्सन लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित इस इंजेक्शन का सरकारी सैंपल जांच में पूरी तरह सब-स्टैंडर्ड (फेल) पाया गया है, जिसके बाद विभाग ने यह आपातकालीन आदेश जारी किया है। दवा नियंत्रण विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इस इंजेक्शन में मौजूद मुख्य सक्रिय घटक ऑक्सीटोसिन की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई। दवा में सांद्रता (पोटेंसी) कम होने के कारण इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रसव जैसे संवेदनशील समय पर जीवन रक्षक मानी जाने वाली दवा का सब-स्टैंडर्ड होना मरीजों के लिए सीधे तौर पर जानलेवा साबित हो सकता है। इसी को देखते हुए विभाग ने एहतियातन इस बैच की बिक्री और उपयोग को संपूर्ण राज्य में प्रतिबंधित कर दिया है।
कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत से मचा हडक़ंप, संदिग्ध जुड़ाव की जांच जारी जानकारी के अनुसार, कोटा के चिकित्सालयों में इसी कंपनी के 1 एमएल क्वांटिटी वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन करीब 12 हजार प्रसूताओं को लगाए गए थे। हाल ही में वहां पांच प्रसूताओं की असामयिक मौत के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में भारी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, इन मौतों और इस सब-स्टैंडर्ड इंजेक्शन के बीच सीधे संबंध की कडय़िों को जोडऩे के लिए उच्च स्तरीय विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे बेहद गंभीर माना जा रहा है। एहतियात के तौर पर सरकार ने पशुओं से अत्यधिक काम कराने के लिए इस इंजेक्शन के दुरुपयोग पर भी निगरानी बढ़ा दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव विज्ञान में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बेहद अहम और बुनियादी जीवन रक्षक दवा मानी जाती है। इसका मुख्य उपयोग गर्भवती महिलाओं में प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) को कृत्रिम रूप से शुरू कराने और बच्चे के जन्म के तुरंत बाद गर्भाशय से होने वाले अत्यधिक और जानलेवा रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। यदि इस इंजेक्शन की गुणवत्ता में थोड़ी भी कमी हो, तो प्रसूता के शरीर से अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी जान को तत्काल खतरा पैदा हो जाता है। यही कारण है कि प्रसूति सेवाओं में इसे एक बेहद संवेदनशील दवा का दर्जा प्राप्त है।
ड्रग कंट्रोल विभाग के कड़े निर्देश, स्टॉक को तत्काल अलग करने के आदेश
ड्रग कंट्रोल विभाग ने राज्यभर के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों, थोक व खुदरा मेडिकल स्टोर्स तथा स्वास्थ्य संस्थानों को संबंधित संदिग्ध बैच का उपयोग व बिक्री तत्काल बंद करने की ताकीद की है। सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद इस दवा के उपलब्ध स्टॉक को तुरंत सील कर बाजार से हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग द्वारा विस्तृत और गहन जांच की जा रही है ताकि इसके निर्माण और वितरण में हुई लापरवाही के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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