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जयपुर,। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को शासन सचिवालय में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर दौसा जिले में हुई भीषण सड़क दुर्घटना को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। उन्होंने राज्य स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा घटना स्थल के निरीक्षण एवं तथ्यों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए कहा कि यह दुर्घटना सभी संबंधित विभागों के लिए एक वॉर्निंग बेल है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में अमूल्य जीवन की हानि स्वीकार्य नहीं है तथा सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में प्रभावी सुधारात्मक उपाय किए जाएं। इनसे दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर में निरंतर कमी आए और जीरो फेटेलिटी के लक्ष्य की दिशा में कार्य हो।
मुख्य सचिव ने दुर्घटना के क्रम, दुर्घटनाग्रस्त बस एवं ट्रेलर की स्थिति, दोनों वाहनों के पंजीयन, फिटनेस, बीमा, लंबित चालानों, वाहन स्वामियों एवं चालकों की पृष्ठभूमि तथा अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों के संबंध में संबंधित राज्यों के परिवहन विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक जांच पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस की बॉडी, संरचनात्मक सुरक्षा, आग लगने के कारणों तथा एफएसएल जांच की प्रगति की भी समीक्षा की।
बैठक में मुख्य सचिव ने दुर्घटना स्थल पर उपलब्ध सीसीटीवी एवं पीटीजेड कैमरों की फुटेज का अवलोकन करते हुए दुर्घटना के समय की परिस्थितियों, ट्रेलर की दृश्यता, लेन ड्राइविंग, रात्रिकालीन विजिबिलिटी, रिफ्लेक्टर टेप एवं रिफ्लेक्टर लाइट, मार्ग संकेतकों तथा ट्रम्पेट इंटरचेंज पर भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप साइनेज व्यवस्था की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर मोड़ से पर्याप्त दूरी पूर्व बड़े एवं स्पष्ट साइनेज लगाए जाएं तथा ब्लैक स्पॉट्स एवं रात्रिकालीन दृश्यता के लिए अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए पुलिस, एनएचएआई कंट्रोल सेंटर, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं अन्य आपातकालीन एजेंसियों की रिस्पॉन्स टाइम, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की कार्यवाही, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में लगे समय, ट्रॉमा सेंटर की उपलब्धता, भौगोलिक दूरी तथा पोस्ट एक्सीडेंट इन्जरी मैनेजमेंट की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद होने वाली मृत्यु को न्यूनतम करना भी सड़क सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण पक्ष है जितना दुर्घटनाओं की रोकथाम।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस को चरणबद्ध रूप से एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस में उन्नत किया जाए। इससे गंभीर घायलों को मौके पर ही बेहतर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही ट्रॉमा सेंटर, फायर फाइटिंग व्हीकल्स, क्रेन तथा अन्य आपातकालीन संसाधनों की वैज्ञानिक दूरी पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समुचित कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण के विरुद्ध राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा टास्क फोर्स के अध्यक्ष के रूप में जिला कलक्टर नियमित मॉनिटरिंग करें तथा अतिक्रमणों एवं अवैध पार्किंग स्थलों का चिन्हीकरण कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें।
मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर भारी एवं वाणिज्यिक वाहनों में रिफ्लेक्टर टेप की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने रिफ्लेक्टर एवं सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध चालान सहित प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा। साथ ही वाहन पोर्टल पर अधिक लंबित चालान वाले वाहनों के विरुद्ध निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा परिवहन यूनियनों एवं बस ऑपरेटरों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर सड़क सुरक्षा नियमों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में वे-साइड एमेनिटीज, ट्रक चालकों के लिए डॉर्मिटरी एवं विश्राम सुविधाओं, आईटीएमएस की कार्यप्रणाली, रियल टाइम प्रवर्तन, ओवरस्पीडिंग चालान, हाईवे दुर्घटनाओं के विश्लेषण, अतिरिक्त ब्लैक स्पॉट चिन्हीकरण, फायर ब्रिगेड की रणनीतिक पोजिशनिंग तथा निवारक निरीक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग निर्धारित दायित्वों का समयबद्ध पालन करें तथा इस विषय पर नियमित फॉलोअप समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दौसा जिला कलक्टर , जिला पुलिस अधीक्षक चिकित्सा विभाग एवं फायर सेफ्टी विभाग के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से घटना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य, जिला अस्पताल में घायलों को उपलब्ध कराए गए उपचार तथा वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए।
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