It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : साइबर फ्रॉड की राशि आने पर पूरा बैंक खाता फ्रीज करना गलत
By Lokjeewan Daily - 09-07-2026

  जोधपुर: किसी फर्म के खाते में साइबर फ्रॉड की आंशिक राशि जमा होने पर पूरे खाते को फ्रीज करने की बैंक की कार्रवाई को राज्य उपभोक्ता आयोग ने गलत ठहराया है। आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छावाहा एवं सदस्य लियाकत अली की पीठ ने इस संबंध में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI), कृषि उपज मंडी बाड़मेर की निगरानी याचिका को सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।
क्या था मामला?
बाड़मेर की फर्म 'श्रीकार्ट ई कॉमर्स' के प्रोपराइटर गणपतसिंह और जोगाराम का एसबीआई बाड़मेर में एक खाता था। वर्ष 2025 में इस खाते में साइबर फ्रॉड की $105,898$ रुपये की राशि जमा हुई थी। साइबर क्राइम पुलिस से मिले एक ईमेल के आधार पर बैंक ने फर्म का पूरा खाता ही फ्रीज कर दिया। इसके खिलाफ फर्म ने जिला उपभोक्ता आयोग बाड़मेर की शरण ली और अंतरिम प्रार्थना पत्र देकर मांग की कि केवल विवादित राशि ($105,898$ रुपये) को फ्रीज रखा जाए और बाकी रकम से लेनदेन प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए। जिला आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में आदेश दिया, जिसे एसबीआई ने राज्य आयोग में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान बैंक ने तर्क दिया कि यह व्यापारिक खाता है, इसलिए परिवादी 'उपभोक्ता' की श्रेणी में नहीं आता। वहीं परिवादी के वकील ने कहा कि वह जीवनयापन के लिए ई-मित्र का काम करता है।
राज्य आयोग ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा: "यदि कोई निश्चित राशि विवादित रही हो, तो केवल उक्त राशि की हद तक ही बैंक खाते को होल्ड पर रखा जाना चाहिए। संपूर्ण बैंक खाते को होल्ड पर रखना किसी भी लिहाज से न्यायोचित नहीं माना जा सकता, ताकि परिवादी की फर्म का शेष व्यापार और लेनदेन प्रभावित न हो।"
इस मामले में बैंक की ओर से अधिवक्ता नितिन ओझा और विपक्षी (परिवादी) की ओर से अधिवक्ता शगुन माथुर ने पैरवी की।

अन्य सम्बंधित खबरे