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जयपुर । जयपुर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कथक के महान आचार्य गुरु पंडित कुंदनलाल गंगानी की जन्मशताब्दी के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह का शुभारंभ हुआ। समारोह का आयोजन गुरु कुंदनलाल गंगानी फाउंडेशन तथा जवाहर कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कथक कलाकारों, शिष्यों और कला प्रेमियों ने सहभागिता करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना से हुई शुरुआत समारोह का शुभारंभ पारंपरिक रीति से दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना के साथ हुआ। इसके बाद मंच पर कथक की विविध प्रस्तुतियों का सिलसिला आरंभ हुआ। आयोजन के पहले दिन जयपुर और लखनऊ घराने की कथक परम्पराओं का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरूआत पंडित राजेन्द्र गंगानी के गुरु स्मरण से हुई। उन्होंने जयपुर घराने की पारम्परिक लयकारी, दमदार तत्कार और चक्करों की प्रस्तुति दी। गंगानी की प्रस्तुति के बाद लखनऊ घराने के वरिष्ठ कथक नर्तक पंडित राममोहन महाराज ने अपने नृत्य में नजाकत, ठहराव और भावाभिनय का बेहतरीन प्रदर्शन किया। नृत्यांगना मनीषा गुलयानी ने अपनी नृत्य प्रस्तुति में तकनीकी परिष्कार और ताल पक्ष की स्पष्टता से दर्शकों को प्रभावित किया। आयोजन के पहले दिन गुरु कुंदन लाल गंगानी फाउंडेशन के छात्रों और कोलकाता के साधना स्वरंग समूह ने भी अपनी कथक प्रस्तुतियाँ दीं।
युवा और वरिष्ठ कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां
समारोह के प्रथम दिन अनेक युवा और वरिष्ठ कथक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को कला रस से सराबोर कर दिया। कलाकारों ने पारंपरिक बंदिशों, ताल संरचनाओं, गत, तत्कार और अभिव्यक्ति प्रधान प्रस्तुतियों के माध्यम से कथक की समृद्ध परंपरा का परिचय कराया। दर्शकों ने प्रत्येक प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और कलाकारों का लंबे समय तक तालियों से अभिनंदन किया।
गुरु पंडित कुंदनलाल गंगानी के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु पंडित कुंदनलाल गंगानी के भारतीय शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गुरु गंगानी ने जयपुर घराने की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया तथा अनेक शिष्यों को तैयार कर कथक की समृद्ध विरासत को देश और विदेश तक प्रतिष्ठा दिलाई। उनके द्वारा स्थापित शिक्षण परंपरा आज भी अनेक कलाकारों के माध्यम से आगे बढ़ रही है।
सम्मान और सांस्कृतिक संवाद का बना अवसर
समारोह के दौरान कला जगत से जुड़े अनेक वरिष्ठ व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। कलाकारों और शिष्यों के बीच संवाद के माध्यम से कथक की परंपरा, उसके संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसके प्रभावी प्रसार पर भी विचार साझा किए गए। कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा को पुनः रेखांकित करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया।
आगामी प्रस्तुतियों को लेकर उत्साह
जन्मशताब्दी समारोह के अगले चरणों में देश के प्रतिष्ठित कथक कलाकारों की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में भी विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों, संवाद सत्रों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से गुरु पंडित कुंदनलाल गंगानी की कला साधना और उनकी विरासत को व्यापक रूप से स्मरण किया जाएगा। तीन दिवसीय यह आयोजन गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कथक प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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