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राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाईज यूनियन द्वारा 57वें बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस का आयोजन
By Lokjeewan Daily - 19-07-2026

जयपुर। राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलाईज यूनियन की ओर से तारक भवन जयपुर में रामगोपाल शर्मा की अध्यक्षता में 57वां बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में आरपीबीयू महासचिव महेश मिश्रा सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा, सचिव महेश शर्मा, महिला विंग की संयोजिका मेघा मलिक, राहुल पांडे आर जी शर्मा ने विचार व्यक्त किए, इस अवसर पर विभिन्न सार्वजनिक बैंक ,सहकारी बैंकों के कार्मिकों, किसान आमजन और ग्राहकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए महेश मिश्रा ने कहा कि 19 जुलाई 1969 को 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण एक ऐतिहासिक फैसला था। इसके बाद ही बैंकिंग गांव-गांव, किसान-मजदूर तक पहुंची।सार्वजनिक और सरकारी सहकारी बैंकों में जमाए सुरक्षित है ।
सहकार नेता सूरज भान सिंह आमेरा ने बताया कि राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों ने ही कोरोना काल, नोटबंदी और PMC-यस बैंक जैसी आपदाओं में आम जनता की जमा को सुरक्षा दी। आज भी किसान क्रेडिट कार्ड, मुद्रा लोन, जनधन खाते ,फसली ऋण और ग्रामीण सरकारी योजनाओं का लाभ केवल सार्वजनिक और सहकारी बैंक ही जमीनी स्तर तक पहुंचा रहे हैं। इसलिए राष्ट्रीयकरण आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 57 साल पहले था।*आमेरा ने निजीकरण की चुनौती और कड़ा विरोध*करते हुए केंद्र सरकार की बैंक निजीकरण की नीति को *जन विरोधी बताया। कहा गया कि सार्वजनिक बैंक सार्वजनिक हित में है, निजी सहकारी बैंक PMC में 10 हजार करोड़ का घोटाला , आदर्श सहकारी बैंक घोटाला और यस बैंक का संकट इसका जीता-जागता उदाहरण है। निजीकरण से बैंकिंग केवल मुनाफे का धंधा बन जाएगी और गरीब, किसान, MSME ऋण से वंचित हो जाएंगे।
आयोजन सभा ने प्रस्ताव पारित कर बैंक निजीकरण को तुरंत रद्द करने की मांग की गई और राष्ट्रीयकरण को बचाने की शपथ ली गई*।
नेताओं ने कहा कि निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान ग्राहको आमजन के साथ साथ बैंक कार्मिकों को होगा। ठेके पर भर्ती, पुरानी पेंशन बंदी और वेतन समझौते सेवा शर्तों में कटौती से 10 लाख बैंक कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है।साथ ही निजी अरबन सहकारी बैंकों में जनता की जमाए डूबने से, पर्याप्त भर्ती नहीं होने और पैक्स कार्मिकों को 20% आरक्षण नहीं देने से ग्रामीण सहकारी बैंकिंग ऋण व्यवस्था चरमरा रही है। इससे किसान और आम ग्राहक सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

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