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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सचिवालय पर प्रदर्शन
By Lokjeewan Daily - 21-07-2026

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय और शासन सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नियमितिकरण, मानदेय बढ़ाने और आंगनवाड़ी कर्मियों से गैर-आईसीडीएस कार्य नहीं करवाने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को डिटेन कर गांधीनगर थाने पहुंचाया। बाद में सभी को थाने से छोड़कर उनके-अपने घरों के लिए रवाना कर दिया गया।

1 जुलाई से चल रहा था आंदोलन अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के आह्वान पर आंगनवाड़ी कर्मियों का आंदोलन 1 जुलाई से शुरू हुआ था। 1 से 6 जुलाई तक कार्य बहिष्कार किया गया, जबकि 7 से 18 जुलाई तक आम हड़ताल और ताला बंदी रही।

18 जुलाई को विभाग और कर्मचारी संघ के बीच समझौता हुआ था। इसमें ग्रेच्युटी से जुड़े आदेश जल्द जारी करने और अन्य राज्यों में दिए जा रहे मानदेय का अध्ययन कर तीन महीने के भीतर मानदेय बढ़ाने पर निर्णय लेने पर सहमति बनी। समझौता पत्र पर विभाग की ओर से निदेशक वासुदेव मालावत और अतिरिक्त निदेशक दीनानाथ बब्बल, जबकि संघ की ओर से संस्थापक छोटीलाल बुनकर, संरक्षक विनीता शेखावत, प्रदेशाध्यक्ष रचना शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद हड़ताल समाप्त करने की घोषणा भी कर दी गई थी।

मानदेय बढ़ोतरी पर स्पष्टता नहीं होने से नाराजगी हालांकि, कुछ आंगनवाड़ी कर्मियों ने समझौते का विरोध किया। उनका कहना है कि समझौते में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मानदेय कितना बढ़ाया जाएगा। इसी वजह से सोमवार को उन्होंने फिर से प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी कर्मियों का कहना है कि मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में आंगनवाड़ी कर्मियों को 11 हजार से 20 हजार रुपए तक मानदेय मिलता है, जबकि राजस्थान में कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को करीब 6,500 से 10,500 रुपए तक ही मानदेय दिया जा रहा है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों के बराबर मानदेय तय कर जल्द आदेश जारी किए जाएं।

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