It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

नौ साल की अंजलि जाते-जाते तीन लोगों को दे गई नई जिंदगी
By Lokjeewan Daily - 29-08-2026

जोधपुर। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 9 साल की अंजलि ने दुनिया से जाते-जाते तीन लोगों को नई जिंदगी देने का नेक काम किया। 19 अगस्त को हादसे के बाद उसका जोधपुर एम्स में इलाज चल रहा था। 27 अगस्त को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का फैसला लिया। अंजलि की दोनों किडनी और लीवर शनिवार को डोनेट किए गए। एक किडनी और लीवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया, जबकि दूसरी किडनी जोधपुर एम्स में ही एक मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी। इससे तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है। अंजलि के पिता अशोक दास ने बताया कि वे पचपदरा के रहने वाले हैं। 19 अगस्त को अंजलि स्कूल जा रही थी। सड़क पार करते समय डंपर ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में उसके सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। इसके बाद उसे जोधपुर एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
अशोक दास ड्राइवर हैं, जबकि उनकी पत्नी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि शादी के 12 साल बाद उनके बच्चे हुए थे। अंजलि के अलावा उनका एक बेटा भी है। शुरुआत में परिवार अंगदान के लिए तैयार नहीं था, लेकिन समझाने के बाद उन्होंने सहमति दे दी।
SOTTO, ROTTO और NOTTO के समन्वय से परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित किया गया। एम्स जोधपुर में मार्च 2024 में मृतक अंगदान कार्यक्रम शुरू हुआ था। अंजलि का अंगदान यहां का 12वां कैडैवरिक डोनेशन है। खास बात यह है कि किसी बच्चे द्वारा यह तीसरा अंगदान है। अब तक एम्स जोधपुर में 37 अंग डोनेट किए जा चुके हैं।
ब्रेन डेड होने के बाद वेंटिलेटर की मदद से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाकर उन्हें कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि जरूरतमंद मरीजों में उनका प्रत्यारोपण किया जा सके। अंजलि के परिवार के इस फैसले ने दुख की घड़ी में मानवता की मिसाल पेश की है।

अन्य सम्बंधित खबरे