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जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक कवच है। इसके संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयास यह दर्शाते हैं कि विज्ञान आधारित नीतियों, प्रभावी क्रियान्वयन और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है।स
उन्होंने कहा कि आज ओजोन संरक्षण को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखने की आवश्यकता है। बढ़ते तापमान और शीतलन की बढ़ती जरूरत के बीच ऐसी तकनीकों एवं प्रणालियों को बढ़ावा देना जरूरी है, जो ऊर्जा की बचत के साथ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालें। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों, उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और आमजन को पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से जोड़कर ही व्यापक बदलाव लाया जा सकता है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास आज बुधवार को सचिवालय में विश्व ओजोन दिवस पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी पोस्टर का विमोचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के बाद से ही गंभीर प्रयास जारी है। ओजोन दिवस का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आमजन के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
- सतत शीतलन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : अध्यक्षा, आरएसपीसीबी
इस अवसर पर मौजूद राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्षा अपर्णा अरोरा ने कहा कि ओजोन परत का संरक्षण केवल एक वैश्विक पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है। वर्तमान में बढ़ते तापमान के कारण शीतलन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल शीतलन तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
अरोरा ने कहा कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जन-जागरूकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों एवं आमजन को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। श्रीमती अरोरा ने कहा कि “ओजोन संरक्षण की सफलता हमें यह संदेश देती है कि जब सरकार, उद्योग और समाज एक साझा उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो पर्यावरणीय बदलाव संभव है। पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सफल बनाने के लिए आमजन की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। ऊर्जा की बचत, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, पर्यावरण अनुकूल शीतलन साधनों को प्राथमिकता तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपना कर प्रत्येक नागरिक अपना योगदान दे सकता है।
- जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को और प्रभावी बनाने की जरूरत - अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण
अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार ने कहा कि ओजोन संरक्षण वैश्विक पर्यावरणीय सहयोग की एक महत्वपूर्ण सफलता का उदाहरण है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और उसके तहत किए गए प्रयासों ने यह साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं निरंतर प्रतिबद्धता के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकता है।
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्यावरण सचिव शैलजा देवल ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भविष्यगामी एप्रोच के साथ काम कर रही है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पर्यावरण प्रदूषण का सीधा असर पड़ा है। प्रजातियां नष्ट हो रही है तो नेपाल त्रासदी जैसी घटनाएं हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें उर्जा दक्षता, रिसाइक्लिंग और पानी की बूंद बूंद बचत की और ध्यान देना होगा।
इस दौरान मैसर्स एसआरएफ लिमिटेड, भिवाड़ी के सहायक उपाध्यक्ष पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मुकेश किरार ने “ओजोन परत का संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन में कमी” विषय पर ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के प्रभाव तथा उनके नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।
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