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RAJ-RERA : फ्लैट देने में लापरवाही पर द क्राउन प्रोजेक्ट का बिल्डर देगा 9 लाख का हर्जाना
By Lokjeewan Daily - 09-04-2026

जयपुर राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर आर. एस. कुलहरि ने बिल्डरों की मनमानी और सेवा में दोष पर कड़ा प्रहार करते हुए ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कुलहरि ने गोरबंध फोर्ट एंड पैलेस एलएलपी को आदेश दिया है कि वह अपने प्रोजेक्ट द क्राउन के एक आवंटी को हुए भारी वित्तीय नुकसान और मानसिक पीड़ा के एवज में कुल ₹9,00,000 का हर्जाना अदा करे।

 यह मामला जयपुर के टोंक रोड स्थित आलीशान प्रोजेक्ट द क्राउन के टावर-A में फ्लैट नंबर 502 की बुकिंग से जुड़ा है। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार गोयल ने अपनी जीवन भर की पूंजी इस उम्मीद में निवेश की थी कि उन्हें समय पर उनके सपनों का घर मिलेगा। हालांकि, प्रमोटर अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा करने और कब्जा देने में विफल रहा। मुख्य रेरा अथॉरिटी द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों के बावजूद, आवंटी को हुई क्षति की भरपाई नहीं हो पाई थी, जिसके बाद उन्होंने एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के समक्ष मुआवजे की गुहार लगाई थी।
सुनवाई के दौरान एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने पाया कि पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। कोर्ट ने माना कि जब किसी आवंटी का पैसा सालों तक बिल्डर के पास फंसा रहता है और अंत में उसे घर नहीं मिलता, तो वह न केवल अपने निवेश पर ब्याज खोता है, बल्कि उसी इलाके में उसी कीमत पर घर खरीदने का अवसर भी खो देता है। अथॉरिटी ने इसे 'फाइनेंशियल लॉस' (वित्तीय हानि) की श्रेणी में रखते हुए बिल्डर को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
अथॉरिटी ने तथ्यों और परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद बिल्डर को निर्देश दिए हैं कि अवसर की हानि और रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों के एवज में 8,00,000 रुपए, सेवा में कमी, मानसिक पीड़ा और आवंटी को रेरा अथॉरिटी से लेकर ट्रिब्यूनल तक चक्कर लगवाने के खर्च के रूप में 1,00,000 रुपए का भुगतान किया जाए।
रेरा ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह इस कुल ₹9,00,000 की राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित करे। यदि प्रमोटर इस निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो आवंटी को पूरी हर्जाना राशि पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज पाने का अधिकार होगा।

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