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जयपुर राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई खरीदार समय पर भुगतान नहीं करता और जानबूझकर अनुबंध की शर्तों से बचता है, तो प्रमोटर को उसकी बुकिंग रद्द करने का कानूनी अधिकार है। सनसिटी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और बद्रीविशाल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करते हुए व्यवस्था दी कि आवंटी ने अपनी वित्तीय जवाबदेही पूरी नहीं की। रेरा ने बिल्डर को अनुमति दी है कि वह नियमानुसार आवंटी ललित कुमार अग्रवाल की ₹3,11,000 की बुकिंग राशि जब्त (Forfeit) कर सकता है।
यह विवाद जयपुर स्थित प्रोजेक्ट "सनसिटी टाउनशिप, फेज-1, एक्सटेंशन-1" के प्लॉट नंबर A-795 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ललित कुमार अग्रवाल ने साल 2011 में इस प्लॉट की बुकिंग कराई थी और अब तक कुल ₹3,11,000 जमा कराए थे। आवंटी का आरोप था कि बिल्डर ने उन्हें समय पर कब्जा नहीं दिया और बिना समझौता किए ही मेंटेनेंस (CAM) शुल्क के बिल भेजने शुरू कर दिए। इसी आधार पर उन्होंने रेरा से ब्याज सहित रिफंड या कब्जे की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रोजेक्ट रेरा पोर्टल पर 'पूर्ण' श्रेणी में दर्ज है। बिल्डर ने साक्ष्य पेश किए कि आवंटी को शेष राशि जमा करने और विक्रय समझौता (ATS) निष्पादित करने के लिए कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन आवंटी ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। अथॉरिटी ने माना कि बिल्डर द्वारा मेंटेनेंस चार्ज का बिल भेजा जाना एक लिपिकीय त्रुटि हो सकती है, लेकिन इसका उपयोग आवंटी अपनी भुगतान चूक को छिपाने के लिए नहीं कर सकता। अथॉरिटी ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि आवंटी ने साल 2011 से ही शेष राशि का भुगतान न करके और एग्रीमेंट साइन न करके बुकिंग को केवल जीवित रखा, जबकि प्रोजेक्ट रहने के लिए तैयार था।
रेरा ने इसे आवंटी की ओर से 'बौनाफाइड' (सद्भावनापूर्ण) आचरण नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि रेरा कानून केवल खरीदारों की सुरक्षा के लिए नहीं है, बल्कि यह बिल्डरों को भी उन आवंटियों के खिलाफ अधिकार देता है जो अनुबंध का पालन नहीं करते। रेरा ने प्रमोटर को पूरी स्वतंत्रता दी है कि वह आवंटी की बुकिंग को रद्द कर दे और नियमानुसार जमा राशि जब्त कर ले।
यह फैसला उन निवेशकों के लिए एक नजीर है जो प्रॉपर्टी की बुकिंग तो कर लेते हैं, लेकिन बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भुगतान रोक देते हैं। रेरा ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्ण हो चुके प्रोजेक्ट्स में भुगतान न करना रद्दीकरण का आधार बनेगा।
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