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जयपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज 'मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को एक पत्र लिखकर प्रदेश की बालिकाओं और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और जरूरी विषय की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है। गहलोत ने मांग की है कि राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा से जुड़ी 'उड़ान योजना' के तहत निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन का वितरण तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मासिक धर्म स्वच्छता केवल एक स्वास्थ्य विषय नहीं, बल्कि महिलाओं की शिक्षा, आत्मसम्मान और सामाजिक भागीदारी से सीधे जुड़ा हुआ मूलभूत अधिकार है। जब किशोरियों और महिलाओं को स्वच्छ सेनेटरी उत्पाद उपलब्ध नहीं होते, तब वे न केवल शारीरिक कष्ट झेलती हैं, बल्कि सेनेटरी नैपकिन की अनुपलब्धता के कारण कपड़े, राख और मिट्टी जैसे असुरक्षित विकल्पों का उपयोग करने पर विवश हो जाती हैं। इससे गर्भाशय व प्रजनन संबंधी संक्रमण, मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) एवं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके साथ ही, किशोरी बालिकाएं विद्यालय से अनुपस्थित रहने लगती हैं और माहवारी से जुड़ी शर्म व सामाजिक कलंक के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ देती हैं, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति और महिलाओं की आर्थिक उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
इस संदर्भ में ऐतिहासिक कानूनी पक्ष को रेखांकित करते हुए गहलोत ने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 30 जनवरी 2025 को एक ऐतिहासिक निर्णय में मासिक धर्म स्वच्छता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के मूल अधिकार का अभिन्न अंग घोषित किया है, जिसके तहत सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को निःशुल्क बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाने का आदेश है।
उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का संदर्भ देते हुए बताया कि वर्ष 2021 में प्रारंभ की गई 'आई एम शक्ति उड़ान योजना' के अंतर्गत राजस्थान की 10 से 45 वर्ष की समस्त बालिकाओं एवं महिलाओं को प्रतिमाह 12 निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन वितरित किए जाते थे, जिससे प्रदेश की लगभग 1 करोड़ 20 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही थीं।
वर्तमान स्थिति पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा इस योजना का नाम बदलकर 'कालीबाई भील उड़ान योजना' तो कर दिया गया, परंतु अक्टूबर 2024 के पश्चात् से, यानी पिछले 20 माह से सेनेटरी नैपकिन की खरीद एवं वितरण पूर्णतः ठप पड़ा हुआ है, जो कि लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ अन्याय होने के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भावना के भी सर्वथा विपरीत है।
आज इस महत्वपूर्ण अवसर पर अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें उड़ान योजना के अंतर्गत निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन वितरण को तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ करना और माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करते समय इसका विस्तार करवाना शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य जागरूकता अभियान विद्यालयों, कॉलेजों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के बीच नियमित रूप से चलाया जाए तथा नैपकिन की खरीद में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि भाजपा सरकार के दौरान शुरुआत में खरीदी गई सेनेटरी नैपकिन की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं थी जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।
अंत में गहलोत ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री इस मानवीय एवं संवैधानिक दायित्व को पूरी संवेदनशीलता के साथ निभाएंगे और 'उड़ान योजना' को पुनः सुचारू रूप से शुरू कर बालिकाओं एवं महिलाओं को आवश्यक व त्वरित राहत प्रदान करेंगे।
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