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हवन, पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण के साथ सम्पन्न हुई श्री भक्तमाल कथा
By Lokjeewan Daily - 15-06-2026

जयपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर शास्त्री नगर स्थित श्री अमर हरि शीतल धाम में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय श्री भक्तमाल कथा एवं श्रीमद्भागवत पुराण मूल पाठ का सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक अनुष्ठानों के साथ भव्य समापन हो गया। अंतिम दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या कथा स्थल पर पहुंचने लगी। पूरे परिसर में धार्मिक उल्लास, भक्ति भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। कथा के समापन अवसर पर श्रीमद्भागवत पुराण मूल पाठ की पूर्णाहुति, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, संत प्रवचन, सत्संग तथा प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए गए। पांच दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने श्रद्धालुओं को संत परंपरा, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर संत महापुरुषों के जीवन से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों का श्रवण किया तथा आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। 
समापन दिवस पर प्रातःकाल से ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम प्रारम्भ हो गया। वैदिक विधि-विधान के अनुसार श्रीमद्भागवत पुराण मूल पाठ की पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने श्रद्धा पूर्वक भगवान के चरणों में पुष्प अर्पित कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूर्णाहुति कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से धर्म, संस्कार और मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया। पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम दिखाई दिया।

इंदौर से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक साईं गुरुमुखदास रामानंदी ने समापन दिवस पर अपने प्रवचनों में संतों के आदर्श जीवन, सेवा, त्याग और ईश्वर भक्ति की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संत वाणी केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का भी कार्य करती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सदाचार, सेवा, करुणा और मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। कथा के अंतिम दिन उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे समय भक्तिभाव से कथा का रसपान करते रहे।

समापन कार्यक्रम के अंतर्गत वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति देकर विश्व शांति, समाज कल्याण और परिवार की मंगलकामना की। हवन के पश्चात आयोजित सत्संग में संतों ने धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला।
धार्मिक भजनों और संकीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए और पूरे परिसर में आध्यात्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

11 जून से प्रारम्भ हुए इस आयोजन के दौरान प्रतिदिन श्री भक्तमाल कथा और श्रीमद्भागवत पुराण मूल पाठ का आयोजन किया गया। कथा में संतों के जीवन चरित्र, उनके त्याग, तपस्या, समाज सेवा और ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक कथाओं का वर्णन किया गया।
रविवार को आयोजित वटवृक्ष पूजन कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र के धर्मप्रेमी नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और धार्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बनाया।

हवन और प्रवचन कार्यक्रमों के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समापन अवसर पर संतों और समिति पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और सेवाभावियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। पुरुषोत्तम मास में आयोजित यह कथा श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, सेवा और संस्कारों की अमूल्य सीख छोड़ गई।

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