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कांकरोली में चौरासी खम्भ दर्शन बगीचा में बिराजे प्रभु द्वारकाधीश
By Lokjeewan Daily - 02-03-2026

राजसमंद लोकजीवन न्यूज़।  कांकरोली स्थित पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास के द्वारकाधीश मंदिर में फाल्गुन शुक्ल पक्ष त्रैरस रविवार को चौरासी खम्भ मनोरथ के दर्शन द्वारकाधीश बगीचे में बिराजे। रविवार को मंगला के दर्शन प्रात: 6 बजे, श्रृंगार के दर्शन प्रात: 8:30 पर नौ बजे ग्वाल के दर्शन में प्रभु को श्रृंगार में प्रभु के मस्तक पे केशरी छज्जेदार पाग तापे सोने का सेहरा, केशरी चाकदार वाघा, वैसी ही सूथन,वैसों ही अन्तर्वास को पटका मिलमा आभरण, पंतगी कटि को पटका,हरे ठाडे वस्त्र, माला वन माला, लाल खीनखाप को फरगुल। मंदिर के रतन चौक में चौरासी केले के पेड़ों से एक अति सुन्दर बगीचा बनाया गया। जिसमें गुलाबों के पुष्पों साथ आशापाल एवं चंदन के पत्तों एवं विभिन्न फूलों से बगीचा को सुसज्जित किया गया।
कांकरोली की दिव्य परम्परागत द्वारकाधीश प्रभु के मंदिर में तृतीय गृह पीठाधीश्वर गोस्वामी श्वागीश कुमार जी महाराज की आज्ञा से चौरासी खम्भो में बगीचा का दिव्य मनोरथ सम्पन्न हुआ। प्रभु श्रीद्वारिकाधीश जी प्रतीकात्मक  चौरासी खम्भो में सजे बगीचा में बिराजमान हुए।
राजभोग से भोग -आरती तक हजारों भक्तों ने इस दिव्य दर्शन का आनंद उठाया। 84 खंभों में बगीचा के मनोरथ के की पीछे का बड़ा महत्व है बताया जाता है  कि द्वापर युग में गोकुल में 84 खम्बो वाला नंद भावना भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का प्राचीन स्थल है। यह स्थान नंद बाबा का वह घर माना जाता है। जहां कृष्ण ने अपनी शुरुआती  साढ़े तीन वर्ष बीताए थे। यह 84 लाख योनियों के संकट को हर लेती है और जन्म मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है। यह यात्रा कठिन तप और समर्पण का प्रतीक है। जिसे अक्सर नंगे पैर किया जाता है।  यह यात्रा केवल एक पैदल भ्रमण नहीं बल्कि कृष्णमय में होकर जीवन के सभी कष्ट को भूलकर आत्मिक आनंद प्राप्त करने की यात्रा है। ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के स्थलों,वनों,कुंडो और मंदिरों की पवित्र यात्रा है जिसे 40 दिनों में पैदल पुरा किया है। इसका मुख्य भाव 84 लाख योनियों के बंधनों से मुक्ति आध्यात्मिक शुद्धि कृष्ण भक्ति और परम शान्ति पाना है। आज कांकरोली के भाविक भक्तजनों को दिव्य लीला का पान करा कर सबको उपकृत किया। 84 खंभ के दर्शनों में बाहर से पधारे एवं स्थानीय दशर्नाथियों के ऊपर अबीर गुलाल एवं रंगों से पिचकारी से खूब होली खिलाई गई। फाग खेलने के बाद मंदिर के कीर्तनकार मृदंग  एवं चंग वह झांझके साथ रसिया गान किया। आज हरि कुंजन खेलत होरी। गृह -गृहते आईं युवती जन  भोग और आरती के दर्शन 6.30 बजे हुए । हजारों  वैष्णव जनों ने चौरासी खम्भ दर्शन का आनंद लिया। इसके बाद गोवर्धन चौक में राल के दर्शन हुए। तृतीय गृह पीठ युवराज गोस्वामी  वैदान्त कुमार और गोस्वामी संजीव कुमार महाराज ने  गोवर्धन चौक में खुब राल उड़ाई, साथ साथ युवराज ने गुलाल के भरे सिलेण्डर से विभिन्न रंगों की गुलाल उडाई । भक्ति और श्रद्धा का जन सैलाब उमड़ा। 

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