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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तीखा हमला : कहा- भाजपा सरकार के दो वर्षों में 8.4 लाख से अधिक बच्चों ने छोड़ा स्कूल
By Lokjeewan Daily - 09-07-2026

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार की शिक्षा नीतियों और प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने सरकारी आंकड़ों और शिक्षा तंत्र की बदहाली का हवाला देते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया और मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछे हैं। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राज्य के शिक्षा मॉडल के पतन पर गहरी चिंता जताते हुए कहा-"राजस्थान की भाजपा सरकार के मात्र दो वर्षों में ही 8.4 लाख से अधिक स्कूल ड्रॉपआउट होना बेहद चिंताजनक है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब निजी स्कूलों में नामांकन सरकारी स्कूलों से आगे निकल गया है। यह प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की गिरती साख का सीधा प्रमाण है।"

गहलोत ने अपने पोस्ट में विरोधाभासी आंकड़ों को सामने रखते हुए सरकार के कुप्रबंधन को घेरा। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान प्रदेश में शिक्षकों की कुल संख्या 7.8 लाख से बढ़कर 7.9 लाख से अधिक हो गई है, इसके बावजूद कुप्रबंधन और बदहाली के कारण सरकारी स्कूलों ने 9.3 लाख से अधिक छात्र खो दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए लिखा-"आज राजस्थान में सिर्फ स्कूलों की छतें ही नहीं गिर रहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा तंत्र पर जनता का जो बरसों पुराना विश्वास था, वो भी गिर रहा है।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था के चरमराने के पीछे चार बड़े कारण बताए हैं-शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-educational duties) में उलझा कर रखना।
इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदहाली : सरकारी स्कूलों का बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) लगातार दरक रहा है और स्कूलों की रिपेयरिंग (मरम्मत) का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
पाठ्यक्रम का राजनीतिकरण : शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार करने के बजाय सरकार का पूरा ध्यान पाठ्यक्रम के राजनीतिकरण पर केंद्रित है।
दिशाहीन नेतृत्व : शिक्षा मंत्री का ध्यान मुख्य जिम्मेदारी (शिक्षा सुधार) को छोड़कर बाकी सभी राजनीतिक और अन्य जगहों पर लगा हुआ है।

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