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अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार
By Lokjeewan Daily - 04-08-2026

राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह भारतीय युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 65,000 से 80,000 रुपये) प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजता था। वहां उनके पासपोर्ट छीनकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इन्वेस्टमेंट और क्रिप्टो फ्रॉड जैसे साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि I4C के डेटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें इन देशों में भेजा गया था। इनमें से कई लोग अब तक भारत नहीं लौटे हैं। लौट चुके पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां उनके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी।

जांच के दौरान सबसे पहले राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह (दोनों निवासी ब्यावर) को गिरफ्तार किया गया। इनके मोबाइल फोन, पासपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों से विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, बायनेन्स (Binance), फर्जी जीपीएस और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले।
इनसे पूछताछ के बाद ब्यावर निवासी जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार के स्कैम सेंटर जाने की तैयारी में थे।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि साइबर स्कैम सेंटर में पहले उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद फर्जी प्रोफाइल के जरिए भारतीय नागरिकों से सोशल मीडिया पर दोस्ती कर उनका विश्वास जीता जाता था। फिर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये निवेश करवाए जाते थे। ठगी की रकम म्यूल (Mule) खातों के जरिए निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन और कंबोडिया के हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी।

जांच में सामने आया कि विदेश पहुंचते ही युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते थे। रोजाना सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक जबरन काम कराया जाता था। काम छोड़ने या मना करने पर हजारों डॉलर का जुर्माना और मारपीट की धमकी दी जाती थी।

राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX): कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में एचआर (HR) की भूमिका निभाता था। भारत लौटने के बाद इसने ब्यावर के कई युवाओं को 800 डॉलर प्रति माह का लालच देकर कंबोडिया भेजा, जिसके बदले इसे भारी कमीशन मिलता था।
सागर सिंह: कंबोडिया के पोइपेट में फेसबुक पर महिलाओं की फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से दोस्ती करता था। 5-7 दिनों तक सामान्य चैटिंग कर उनकी वित्तीय स्थिति और बैंक डिटेल्स जुटाकर अपने टीम लीडर को सौंप देता था।
जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स: इसके नाम से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बायनेन्स पर खाता संचालित था, जिसके माध्यम से USDT क्रिप्टो के जरिए धन ट्रांसफर किया जाता था। इसने करीब 10 भारतीय युवाओं के दस्तावेज चीनी हैंडलर्स को उपलब्ध कराए।
रवि कुमार उर्फ माही: यह 2023 से कंबोडिया स्थित स्कैम कंपाउंड्स में एक्टिव था और पीड़ितों को फर्जी प्रोफाइल से ठगी की ट्रेनिंग देता था। यह कोलकाता के रास्ते म्यांमार के नए स्कैम सेंटर में शिफ्ट होने जा रहा था।
अनिल कुमार उर्फ डेविल: आरोपी जीतूराज का भाई, जो 2024 में कंबोडिया गया था। इसे म्यांमार के यानचिया (Yanchia Township) स्थित स्कैम सेंटर भेजा जा रहा था, जिसे पुलिस ने म्यांमार की उड़ान भरने से ठीक पहले कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।

एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन एवं डीएसपी/थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार सामोता, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, दौलतराम, कांस्टेबल सुभाष कुमार व चालक सूबे सिंह शामिल थे।

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