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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
राजस्थान के 162 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका) के पहले चरण का मतदान तीखे सियासी तनाव, छिटपुट हिंसा और मतदाताओं के जबरदस्त उत्साह के बीच संपन्न हो रहा है। सुबह 7 बजे से 57 लाख से अधिक मतदाता कुल 20,623 प्रत्याशियों के सियासी भाग्य को ईवीएम में बंद कर रहे हैं। पहले चरण की शुरुआत जहां कुछ इलाकों में तकनीकी खामियों और टकराव के साथ हुई, वहीं मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में मतदाताओं की कतारों ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। डीग की पहाड़ी में 51 प्रतिशत वोटिंग का रिकॉर्ड, ध्रुवीकरण या भागीदारी?
शुरुआती रुझानों में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा डीग जिले की पहाड़ी नगर पालिका से सामने आया, जहां पहले तीन घंटों में ही 51 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण इस भारी मतदान के गहरे सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे अल्पसंख्यक समुदाय की संगठित चुनावी सक्रियता और अपने वार्डों में मजबूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की होड़ के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर शुरुआती घंटों में धीमा रहने वाला शहरी मतदाता अगर इतनी बड़ी तादाद में निकला है, तो यह मौजूदा सत्ता समीकरणों के प्रति मुखर असंतोष या फिर किसी मजबूत स्थानीय लहर का संकेत हो सकता है।
हिरासत, फर्जी मतदान और चुनावी मारपीट
मतदान के दौरान निष्पक्षता को लेकर कई जिलों में सवाल खड़े हुए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी:
नाथद्वारा में 'आप' प्रत्याशी हिरासत में: राजसमंद की नाथद्वारा नगर पालिका के वार्ड-2 से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कानसिंह को पुलिस ने वार्ड-5 में मतदान करने पहुंचने पर पकड़ा। वहीं, इसी वार्ड में भाजपा ने कांग्रेस पर 100 मीटर के दायरे में रुपये बांटने का आरोप लगाया, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ हटाई।
फर्जी मतदान पर बवाल: जालोर के वार्ड-34 में फर्जी वोट डालने पहुंचे युवक को पकड़कर प्रत्याशियों के समर्थकों ने पीट दिया। भीलवाड़ा (वार्ड-22), भरतपुर (वार्ड-31) और अलवर (वार्ड-43) में मतदाताओं ने आरोप लगाया कि जब वे केंद्र पहुंचे, तो उनका वोट पहले ही डाला जा चुका था। झुंझुनूं में हंगामे के बाद तीन युवकों को हिरासत में लिया गया।
हिंसा और हमले: अलवर के वार्ड-43 में वोटिंग से पहले निर्दलीय प्रत्याशी अजय मीरवाल के समर्थकों पर लाठी-डंडों से हमला हुआ, जिसका आरोप भाजपा प्रत्याशी पर लगा। वहीं, सिरोही के मंडार में भाजपा प्रत्याशी नागजीराम देवासी पर जानलेवा हमले का मामला दर्ज हुआ है।
तकनीकी अड़चनें और लोकतंत्र के रंग
अलवर, डूंगरपुर, चूरू, बूंदी और जोधपुर (बालेसर) सहित दर्जनों बूथों पर ईवीएम की तकनीकी खराबी के चलते आधे से डेढ़ घंटे तक मतदान बाधित रहा, जिससे मतदाताओं में आक्रोश देखा गया।
तनाव के बीच चुनावी मैदान से लोकतंत्र की सकारात्मक तस्वीरें भी उभरीं। खेतड़ी में 103 साल की बुजुर्ग महिला और कोटा में व्हीलचेयर पर पहुंचे दिव्यांग मतदाताओं ने अपनी भागीदारी निभाई। जालोर में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा भाजपा उम्मीदवार को अपने हाथ से खाना खिलाने की तस्वीर ने यह साबित किया कि चुनावी कटुता के बीच व्यक्तिगत सौहार्द अभी जिंदा है।
निकाय चुनाव का सियासी संदेश
पहले चरण का यह मिजाज साफ करता है कि निकाय चुनाव अब केवल 'स्थानीय समस्याओं' तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तर्ज पर पूरी तरह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुके हैं।
निर्दलीयों की सक्रियता ने कई जगह पारंपरिक भाजपा-कांग्रेस के समीकरणों को बिगाड़ा है, जिसका नतीजा अलवर जैसी जगहों पर हिंसक टकराव के रूप में दिखा। वहीं, फर्जी मतदान के बार-बार उठते आरोप यह इंगित करते हैं कि स्थानीय स्तर पर जीत का अंतर बेहद कम होने के अंदेशे से राजनीतिक दल हर एक वोट के लिए आक्रामक हो चुके हैं। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को होगा, जबकि 14 सितंबर की मतगणना यह तय करेगी कि जनता ने स्थानीय विकास पर मुहर लगाई है या ध्रुवीकरण और दलीय ताकत पर।
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