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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
जयपुर । राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल में निजी विश्वविद्यालयों के विरूद्ध अनियमितताओं का मामला उठा । बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ के प्रश्न के जवाब में बताया गया कि प्रदेश में कुल 53 निजी विश्वविद्यालय है, इनमें से 10 निजी विश्वविद्यालयों के खिलाफ फर्जी डिग्री और बैक डेट में डिग्री जैसी अनियमितताओ के मामले में जांच के आदेश दिए गए है । वहीं ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू का परिसमापन करते हुए प्रशासक लगा दिया गया है, जबकि सिंघानिया विश्वविद्यालय, झुंझुनूं, सनराईज विश्वविद्यालय, अलवर, श्रीधर विश्वविद्यालय, झुंझुनूं, मेवाड़ विश्वविद्यालय, चित्तौड़गढ़, माधव विश्वविद्यालय, सिरोही, रैफल्स विश्वविद्यालय, अलवर, निर्वाण विश्वविद्यालय, जयपुर , यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर और जगदीश झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनूं के खिलाफ जांच जारी है । इनमें से ओपीजेएस, माधव विश्वविद्यालय, जगदीश झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, सिंघानिया विश्वविद्यालय, भूपाल नोबल विश्वविद्यालय उदयपुर के खिलाफ राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 में अनियमितताएं पाए जाने पर इन विश्वविद्यालयों की समग्र जांच एसओजी के माध्यम से कराए जाने के लिए पत्र प्रेषित किया गया है ।
वहीं पुलिस अधीक्षक एसओजी के मुताबिक बैके डेट में विभिन्न कोर्सेज की अंकतालिकाएं, डिग्री देने के मामले में ओपीजेएस विश्वविद्यालय मालिक जोगेंद्र सिंह, पूर्व रजिस्ट्रार व पूर्व वाईस चांसलर सरिता कडवासरा, पूर्व रजिस्ट्रार जितेंद्र यादव, अकाउटेंट संगीता कडवासरा व सुमित और दलाल सुभाषचंद्र, प्रदीप कुमार शर्मा, परमजीत सिंह, गंगासिह, अवनीश कन्सल, अजय भारद्वाज, बाबुलाल उर्फ बाबु पटेल, और रवि त्यागी को गिरफ्तार किया जाकर जेल भिजवाया गया । वहीं मेवाड़ विश्वविद्यालय चित्तौडगढ़ के तत्कालीन डीन फार्मेसी किशोर चन्द्रुल, कार्यालय सहायक राजेश सिह राणावत, उप परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया जाकर जेल भिजवाया गया । इस मामले की जांच जारी है ।
जबकि नियामक आयोग के गठन के सवाल पर सरकार ने जवाब दिया है कि निजी विश्वविद्यालयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए नियामक आयोग का गठन नीतिगत निर्णय से संबंधित है और इसके लिए परीक्षण प्रक्रियाधीन है ।
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