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जयपुर । राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवार सतीश पूनिया और अलका गुर्जर सोमवार को नामांकन दाखिल किया । दोनों नेताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया । राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूनिया और गुर्जर के राज्यसभा के लिए नामांकन को पार्टी के लिए गर्व की बात बताई। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने संगठन के लिए लगातार काम किया है और उन्हें ऊपरी सदन के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देने का मौका मिलेगा। राठौड़ ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोगों तक पहुंचने की कोशिशें तेज करने और यह पक्का करने को कहा कि सरकारी योजनाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंचें।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पूनिया और अलका गुर्जर ने संगठन में काम किया है; इसलिए, देश के ऊपरी सदन में उनके जाने से राजस्थान को बहुत फायदा होगा।
भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया ने कहा कि हमारा संगठन कड़ी मेहनत और लगन का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि मैंने भी एक आम कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत की थी, और संगठन ने मुझे हर कदम पर सम्मान और मौके दिए हैं।
शीर्ष नेतृत्व, राज्य नेतृत्व और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की शुभकामनाओं की वजह से ही उन्हें राज्यसभा जाने का मौका मिला है।
वहीं, भाजपा की दूसरी राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. अलका गुर्जर ने कहा कि यह अहम मौका पार्टी कार्यकर्ताओं के भरोसे की वजह से मिला है। उन्होंने कहा कि वे सभी 'डबल-इंजन' सरकार और राजस्थान के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।
बता दें कि भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने राजस्थान से पूनिया और अलका गुर्जर को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। उनकी उम्मीदवारी केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की जगह आई है, जिनका कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है और यह अलग-अलग राज्यों के 11 उम्मीदवारों की बड़ी सूची का हिस्सा है।
राजस्थान की तीन सीटों के लिए 18 जून को मतदान किया जाएगा और मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा को दो सीटें मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक प्रमुख जाट नेता पूनिया और अच्छी पकड़ वाले गुर्जर चेहरे को चुनना, राजस्थान में चुनावी रूप से अहम दो समूहों के बीच समर्थन मजबूत करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जाट और गुर्जर समुदाय कई विधानसभा क्षेत्रों पर असर डालते हैं। भाजपा का यह कदम इन समूहों से कांग्रेस के मजबूत नेताओं का मुकाबला करता है। यह सामाजिक संतुलन 2028 के राज्य चुनावों के लिए पार्टी की तैयारी से भी जुड़ा है।
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