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कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस का बड़ा धमाका, कम्बोडिया से चल रहे हजारों करोड़ के चीनी साइबर गिरोह का पर्दाफाश
By Lokjeewan Daily - 20-01-2026

कोटपूतली-बहरोड़ | जिला पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर मुक्ति' के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक ऐसे चीनी साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो न केवल भारतीय नागरिकों से करोड़ों की ठगी कर रहा था, बल्कि भारतीय युवाओं को विदेश में 'साइबर दास' बनाकर उनसे अपराध करवा रहा था। जिला पुलिस अधीक्षक (DIG) श्री देवेन्द्र कुमार बिश्नोई के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।

100 पुलिसकर्मियों की छापेमारी, 25 गिरफ्तार पुलिस ने इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 15 थानों की 25 से अधिक टीमें गठित की थीं। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर मुख्य दलाल सुरेश सेन (रामनगर, बानसूर निवासी) सहित 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल 15 अन्य संदिग्धों से गहन पूछताछ की जा रही है।
कैसे काम करता था यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह?
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार सीधे चीन और कम्बोडिया से जुड़े हैं। गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली है:
युवाओं की तस्करी : दलाल सुरेश सेन बानसूर और आसपास के क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को वियतनाम और थाईलैंड के रास्ते कम्बोडिया भेजता था। अकेले बानसूर से 50 से अधिक युवक भेजे जा चुके हैं।
15 दिनों की 'फ्रॉड ट्रेनिंग' : कम्बोडिया पहुँचने पर इन युवकों को वहां स्थित कॉल सेंटरों में 15 दिनों तक साइबर ठगी की विशेष 'स्क्रिप्ट' पर प्रशिक्षण दिया जाता था।
डिजिटल अरेस्ट का डर: ये ठग खुद को सीबीआई (CBI), पुलिस या ईडी (ED) का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
नकली निवेश का जाल : असली दिखने वाले नकली ट्रेडिंग ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए निवेश के नाम पर हजारों लोगों को चूना लगाया गया।
कम्बोडिया में 'साइबर गुलामी' का साम्राज्य
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कम्बोडिया के इन फर्जी कॉल सेंटरों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के लगभग 1000 से 1500 लोग काम कर रहे हैं। इन युवाओं को $1000 (लगभग 80,000 रुपये) मासिक वेतन और अतिरिक्त इंसेंटिव का लालच दिया जाता है, लेकिन हकीकत में उनसे जबरन 12 से 15 घंटे काम करवाया जाता है।
पुलिस की अपील : लालच में न आएं
एसपी देवेन्द्र कुमार बिश्नोई ने आमजन से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी दिलाने वाले बिना लाइसेंस वाले एजेंटों से बचें। खासकर कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम और म्यांमार जैसे देशों में जाने से पहले कंपनी के ऑफर लेटर और वर्क परमिट की पूरी जांच करें। किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
जांच जारी
साइबर सेल प्रभारी संदीप कुमार यादव के विशेष योगदान से शुरू हुई यह जांच अभी थमी नहीं है। पुलिस अब इस गिरोह के आर्थिक लेन-देन और हवाला नेटवर्क को खंगाल रही है, जिससे और भी बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद है।

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