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करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व

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लोकजीवन संवाददाता

28 अक्टूबर 2026, 05:47 PM 4 मिनट में पढ़ें

करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व

करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के साथ होती है। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को करवा चौथ की पूजा करती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस अवसर पर सरगी ग्रहण करने से लेकर पूजा और चंद्र दर्शन तक के समय का विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सुबह भद्रा की अवधि भी बताई गई है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सरगी, पूजा के मुहूर्त और चंद्रोदय के समय की जानकारी उपयोगी हो सकती है।

करवा चौथ पर सरगी कब खाएं?

करवा चौथ की परंपरा में सरगी का विशेष स्थान है। महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद निर्जला व्रत शुरू करती हैं। आमतौर पर सरगी में फल, मिठाइयां और ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जिन्हें खाने के बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक भद्रा का समय बताया गया है। इसकी अवधि लगभग 21 मिनट रहेगी। ज्योतिषाचार्य की सलाह के अनुसार, इस दौरान सरगी खाने से बचने और शृंगार व पूजा जैसे कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है।

हालांकि, सरगी ग्रहण करने के समय को लेकर महिलाओं को अपने स्थानीय पंचांग और परिवार में प्रचलित परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए। भद्रा से संबंधित मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं।

 

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ पर शाम के समय करवा माता की पूजा और व्रत कथा सुनने की परंपरा है। इस साल 29 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 48 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक पूजा और कथा के लिए शुभ समय बताया गया है।

इस अवधि में महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार करवा माता की पूजा कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं। पूजा के दौरान पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ बैठकर पूजा करती हैं और कथा सुनने के बाद चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं।

पूजा की तैयारी करते समय स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त की जानकारी लेना उचित रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और अन्य खगोलीय गणनाओं के कारण समय में अंतर हो सकता है।

करवा चौथ पर चंद्रोदय कब होगा?

करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देने और पति की लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करने की परंपरा है।

दी गई जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर को रात 8 बजकर 15 मिनट के बाद चंद्रमा के निकलने की संभावना बताई गई है। चंद्रमा के दर्शन करने और अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। कई परिवारों में इस दौरान छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा भी निभाई जाती है।

हालांकि, चंद्रोदय का समय सभी शहरों में एक जैसा नहीं होता। यह भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय अवश्य देखना चाहिए।

करवा चौथ की तैयारी में सरगी, पूजा और चंद्र दर्शन से जुड़े समय की जानकारी पहले से रखना उपयोगी रहता है। सुबह भद्रा को लेकर बताई गई मान्यताओं के अनुसार अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें। शाम की पूजा के लिए निर्धारित समय में पूजा और कथा की तैयारी पूरी कर लें।

चंद्र दर्शन के लिए भी केवल सामान्य समय पर निर्भर रहने के बजाय अपने शहर का स्थानीय समय जांचें। इससे व्रत की परंपराओं का पालन करने में सुविधा होगी।

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