प्रभु श्रीराम के करुण विलाप से नम हुईं आंखें, राज्याभिषेक के साथ सम्पन्न हुई रामलीला
- समापन पर किया कलाकारों को सम्मानित - सात समंदर पार से कमेटी को मिला सहयोग
भीलवाड़ा LOKJEEWAN । श्री रामलीला कमेटी के तत्वावधान में शहर के आजाद चौक स्थित रामलीला मैदान में चल रहे रामलीला महोत्सव का समापन बीती रात मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन के मंचन में जब एक ओर लंका विजय के युद्ध प्रसंगों ने दर्शकों में रोमांच और उत्साह का संचार किया, वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण मूर्छा पर प्रभु श्रीराम के कारुणिक विलाप को देखकर समूचा पंडाल भावविभोर हो उठा और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। महोत्सव के अंतिम चरण का मंचन अत्यंत जीवंत और प्रभावोत्पादक रहा। युद्ध भूमि के प्रसंगों में जैसे ही मेघनाद द्वारा छोड़ा गया अचूक शक्ति बाण वीर लक्ष्मण को लगा, वे अचेत होकर गिर पड़े। अनुज लक्ष्मण की मूर्छा देख लीला स्थल का वातावरण करुणा में डूब गया। प्रभु श्रीराम द्वारा अनुज के प्रेम में किए गए मार्मिक विलाप—जौं जनतेउँ बिनु बिपिन कलेसू, सुरति न करतउँ बंधु सनेहू—के सजीव अभिनय ने हर दर्शक के हृदय को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद संकटमोचन श्री हनुमान द्वारा लंका से सुषेण वैद्य को लाना और द्रोणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर लौटने के दृश्य पर पूरा मैदान जय श्री राम और बजरंगबली की जय के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। संजीवनी के प्रभाव से लक्ष्मण के चेतना में लौटते ही दर्शकों के चेहरों पर राहत और उल्लास छा गया। इसके पश्चात मेघनाद वध और प्रभु श्रीराम द्वारा महाबली कुंभकर्ण के वध के दृश्यों ने अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय का सशक्त संदेश दिया।
राज्याभिषेक के साथ गूंजा अवधपुरी का उल्लास
असत्य पर सत्य की विजय के उपरांत प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन और भव्य राम राज्याभिषेक का मंचन किया गया। स्वर्ण मुकुट धारण किए सिंहासन पर विराजमान प्रभु श्रीराम, माता जानकी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और चरणों में बैठे पवनपुत्र हनुमान का अलौकिक राम दरबार श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। संपूर्ण पंडाल में पुष्प वर्षा हुई और श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर राम दरबार की महाआरती उतारी।
सात समंदर पार भी दिखा आस्था का रंग
कमेटी अध्यक्ष मंजू पोखरना ने बताया कि भारतीय संस्कृति और प्रभु श्रीराम के आदर्शों के प्रति अटूट श्रद्धा केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इसका गहरा प्रभाव है। तकनीक के माध्यम से सात समंदर पार बैठे प्रवासी भारतीय भी ऑनलाइन सीधा प्रसारण देखकर इस मंचन से जुड़े रहे। इसी अगाध श्रद्धा के तहत विदेश में रह रहीं सुरुचि पोखरना ने स्वेच्छा से 21 हजार रुपये की सहयोग राशि कमेटी को भेजी।
दीप प्रज्वलन के बाद किया अतिथियों का सम्मान
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि केशव चिंतन बाजोरिया, गोविंद प्रसाद सोडानी एवं राजेश सोडानी का कमेटी पदाधिकारियों ने रामदुपट्टा ओढ़ाकर भावभीना स्वागत किया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर रामायण जी और प्रभु श्रीराम की आरती की। इस अवसर पर संरक्षक अशोक पोखरना, कार्यकारी अध्यक्ष पंडित गोविंद व्यास, मोहन चौधरी, रामगोपाल सोनी उपस्थित रहे। महोत्सव के अंत में सभी पात्रों और कलाकारों को उत्कृष्ट अभिनय व साधना के लिए स्मृति चिह्न व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ इस धार्मिक महोत्सव का औपचारिक समापन हुआ।
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