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जयपुर

जयपुर की मिट्टी पर सजी प्राकृतिक खेती की पाठशाला

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लोकजीवन संवाददाता

24 सितम्बर 2026, 01:12 PM 2 मिनट में पढ़ें

जयपुर की मिट्टी पर सजी प्राकृतिक खेती की पाठशाला

जयपुर। रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से खेतों की बिगड़ती सेहत और लगातार बढ़ती लागत के बीच अब देश का किसान अपनी जड़ों यानी प्राकृतिक खेती की ओर लौटने लगा है। इसी दिशा में एक नई शुरुआत जयपुर की धरती से हुई है, जहां आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए देशभर के लिए करीब 50 'मास्टर ट्रेनर' तैयार किए गए हैं। ये प्रशिक्षक अब अपने-अपने राज्यों के गांवों और खेतों में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे। यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती एवं डेयरी फार्मिंग मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम जयपुर जिले में अजमेर रोड पर भैराना-बिचून स्थित 'रुद्र शिवम डेयरी एवं नेचुरल रिसर्च सेंटर' में आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और गुजरात सहित 9 राज्यों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
"जल, जंगल, जमीन, जन और जानवर बचेंगे, तभी बचेगा गांव"

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने इस मूल संदेश को रेखांकित किया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अस्तित्व प्रकृति और पशुधन से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती का मतलब केवल रासायनिक खाद या कीटनाशकों को बंद करना भर नहीं है। यह एक समग्र व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य:
मिट्टी की उर्वरता और जैविक क्षमता को बढ़ाना।
सिंचाई जल का संरक्षण करना।
देसी पशुधन (गाय-भैंस) को खेती की मुख्य धारा से जोड़ना।
किसान की लागत घटाकर उसकी आय को टिकाऊ और स्थायी बनाना है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मिट्टी के स्वास्थ्य परीक्षण, डेयरी प्रबंधन, पशुपालन, स्थानीय संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विषयों पर प्रायोगिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में अनुभवी विशेषज्ञों—इंजीनियर रत्नेश शर्मा, तानाजी निकम, मनवीर रेढू, कान सिंह निर्वाण, सुरेंद्र अवाना और डॉ. विनोद चौधरी ने विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों को प्राकृतिक कृषि की बारीकियों से रूबरू कराया।

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