मुख्य सामग्री पर जाएं

गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026

लोकजीवन दैनिक
ई-पेपर
ब्रेकिंग
  • राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों-जयपुर, भिवाड़ी और अजमेर के किशनगढ़ में शनिवार को नई आवासीय योजनाएं लॉन्च करेगा।
  • पूर्व मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
  • केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
  • कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। दीपके तिरंगा रैली में शामिल होने सेंट्रल पार्क जा रहे थे।
भीलवाड़ा

वनवासी कल्याण परिषद ने की मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग

ल

लोकजीवन संवाददाता

22 अक्टूबर 2026, 12:24 PM 3 मिनट में पढ़ें

वनवासी कल्याण परिषद ने की मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग

भीलवाड़ा लोकजीवन। वनवासी कल्याण परिषद ने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान देने और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की उठाई मांग मानगढ़ धाम (जिला बांसवाड़ा) को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर  वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से ज्ञापन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया।  वनवासी कल्याण परिषद के जिला उपाध्यक्ष कैलाश सोनी ने बताया कि ज्ञापन में महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजस्थान के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित करने की मांग की गई। वनवासी कल्याण परिषद के नगरी प्रमुख राम प्रकाश अग्रवाल , दिवाकर जावा, पदम जैन, कैलाश नंदावत ,ज्ञानचंद जैन ने ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गोविंद गुरु के नेतृत्व में संचालित भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में जागृति, सामाजिक सुधार, स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन द्वारा की गई गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष एवं बाल आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक अत्यंत मार्मिक एवं महत्वपूर्ण अध्याय है। ज्ञापन के अनुसार, भगत आंदोलन जनजातीय समाज की अस्मिता की रक्षा, सामंती शोषण तथा अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक व्यवस्था के विरोध में संचालित आंदोलन था। मानगढ़ का बलिदान केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र सहित देश के जनजातीय समाज की साझा ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। इस बलिदान ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की चेतना को और प्रखर किया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा के दौरान इसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात एवं महाराष्ट्र के वीर, देशभक्त और स्वाभिमानी समाज की साझा राष्ट्रीय विरासत के रूप में रेखांकित किया था। वहीं, महामहिम राष्ट्रपति ने 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। इस दौरान रूपलाल अजमेरा ,कमल गोखरू कन्हैयालाल मूंदड़ा, ओम प्रकाश गंदोडिया,तरुणा शर्मा, स्नेहलता ,ऊषा अग्रवाल,अंजना तोषनीवाल, दिनेश विजयवर्गीय, सत्यनारायण सोमानी, भागचंद बाहेती, बाबूलाल शर्मा, महेश खंडेलवाल सहित वनवासी कल्याण परिषद के पदाधिकारी ने ज्ञापन दिया। 

यह खबर अपने दोस्तों के साथ साझा करें

और भी भीलवाड़ा की खबरें

और देखें