एसीएस शिखर अग्रवाल के बाद अब पत्नी पर गिरी गाज, आईपीएस प्रशाखा भी एपीओ
सीएम भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस नीति, एक ही कंपनी से 40 विला खरीद मामले में जांच संभव
जयपुर लोकजीवन न्यूज/ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस नीति पर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि सरकार ने एक ही कंपनी से 40 विला खरीदने के मामले में संदेह के घेरे में आए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) आईएएस शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर को भी एपीओ कर दिया है। कार्मिक विभाग ने प्रशाखा माथुर को एपीओ करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
सरकार ने एक दिन पहले ही आईएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ इस मामले में एसीबी जांच के आदेश दिए गए थे। एसीबी ने मामले में प्राथमिक इंक्वायरी दर्ज कर जांच शुरू कर दी। अब आईपीएस प्रशाखा माथुर को एडीजी प्लानिंग मॉडर्नाइजेंशन वेलफेयर के पद से हटाकर एपीओ कर दिया है। वे 24 अक्टूबर 2025 से इस पद पर कार्यरत थीं।
इससे पहले 29 अक्टूबर की रात को राजस्थान सरकार ने एसीएस शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाते हुए एपीओ कर दिया था। शिखर अग्रवाल पर पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम से भी उसी कंपनी से विला खरीदे गए थे जिससे शिखर अग्रवाल ने खरीदे थे। अंनता रिजॉर्ट के 40 विला में से प्रशाखा माथुर के नाम से भी हिस्सेदारी हैं, इनमें कुछ का जिक्र सालाना प्रॉपर्टी रिटर्न में हैं, लेकिन अलवर में की गई खरीद का जिक्र आईपीआर में नहीं है।
आईपीएस प्रशाखा के खिलाफ भी जांच संभव
विला खरीद मामले में शिखर अग्रवाल के खिलाफ एसीबी जांच शुरू हो चुकी है। अब माना जा रहा है कि 1995 बैच की आईपीएस प्रशाखा माथुर को भी जांच का सामना करना पड़ सकता है। हितों के टकराव, पद के दुरुपयोग के मामले में एसीबी अब जांच आगे बढ़ाने पर प्रशाखा माथुर से भी पूछताछ कर सकती है।
आय से अधिक परिसंपत्तियों की भी हो सकती जांच
गोपनीय सूत्रों से सामने आया है कि वित्त विभाग की ओर से प्राइवेट कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज 27 मार्च को जारी किया गया। उसी दिन शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री करवाई गई है। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि शिखर अग्रवाल की ओर से अपने पदस्थापन के दौरान निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और रा’य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। खुद के और परिजनों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के तथ्यों की भी विस्तृत जांच किया जाना आवश्यक पाया गया।
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